




हरियाणा की खाप पंचायतें हमेशा से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाती रही हैं। लेकिन इस बार खाप पंचायतों ने किसान आंदोलन में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया है, क्योंकि किसान संगठनों के बीच तालमेल की कमी है। फौगाट खाप के प्रधान सुरेश कुमार ने स्पष्ट किया कि खाप पंचायतें किसी एक संगठन का समर्थन नहीं कर सकतीं। उन्होंने किसान संगठनों से आग्रह किया कि वे आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट हों।
फौगाट खाप प्रधान सुरेश कुमार ने किसान नेता डल्लेवाल से अनुरोध किया है कि वे अपना आमरण अनशन समाप्त करें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि सरकार के अड़ियल रवैये से आंदोलनकारी किसानों को नुकसान पहुंच सकता है, लेकिन उनकी मांगें मानने के लिए सरकार पर दबाव तभी डाला जा सकता है, जब सभी संगठन मिलकर एकजुट हों।
फौगाट खाप ने किसान नेता राकेश टिकैत के बयान पर भी सवाल उठाए हैं। सुरेश कुमार का कहना है कि ऐसे बयानों से आंदोलन कमजोर होता है और किसान संगठनों के बीच खाई और गहरी हो जाती है। उन्होंने किसान नेताओं से अपील की कि वे ऐसा कोई भी बयान देने से बचें, जो एकता को नुकसान पहुंचाए।
फौगाट खाप के पदाधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि अगर दोबारा आंदोलन शुरू होता है तो वे इसके लिए हमेशा तैयार रहें। खाप पंचायतें अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए किसान संगठनों का एक होना अनिवार्य है।
फौगाट खाप और अन्य खाप पंचायतों का मानना है कि जब तक किसान संगठन एक मंच पर नहीं आएंगे, तब तक आंदोलन सफल नहीं हो पाएगा। खाप प्रधान सुरेश कुमार ने कहा कि एकता के अभाव में किसान आंदोलन को सही दिशा नहीं मिल पाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की है कि वे डल्लेवाल की मांगों को स्वीकार करके उनके अनशन को समाप्त करवाएं, क्योंकि अगर इस दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है।




