




प्रेस वार्ता के दौरान जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी की सराहना की जिसमें अदालत ने उनकी जीवन की अहमियत को रेखांकित किया। डल्लेवाल ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करता हूँ कि उसने मेरी जिंदगी की प्रवाह की। लेकिन मेरी जिंदगी से ज्यादा जरूरी उन किसानों की जिंदगी है, जिन्होंने कर्ज के बोझ से आत्महत्या की है।
उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि देश में अब तक करीब 7 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। उन्होंने उन परिवारों का दर्द साझा किया, जिन्होंने अपने प्रियजनों को कर्ज की वजह से खो दिया।
डल्लेवाल ने अपनी मुख्य मांगों को दोहराते हुए कहा कि यदि किसानों की आत्महत्या को रोकना है, तो सरकार को तुरंत प्रभाव से कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने दो प्रमुख सुझाव दिए:
उन्होंने सरकार और न्यायपालिका से आग्रह किया कि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं ताकि किसानों की आत्महत्याओं का अंत हो।
डल्लेवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके लिए उचित मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवाने का आदेश दिया है, लेकिन सरकार इस आदेश की सही व्याख्या करने में विफल हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है, विशेषकर 26 तारीख के बाद। उन्होंने सरकार से अपील की कि कोई ऐसा कदम न उठाए जो किसानों के सहनशक्ति के बाहर हो।
डल्लेवाल ने स्पष्ट किया कि यदि किसी किसान को कोई नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
किसान नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से कहा कि वे किसानों की मांगों को प्राथमिकता दें और उनके मुद्दों को हल करने के लिए ठोस कदम उठाएं।
इस प्रेस वार्ता ने किसानों के मुद्दों और उनकी मांगों को एक बार फिर से केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या कदम उठाते हैं और क्या किसानों की यह लड़ाई अपने लक्ष्य तक पहुंच पाती है।
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