




किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की तबीयत बिगड़ने पर राकेश टिकैत ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत किसान संगठनों से बातचीत करनी चाहिए। टिकैत ने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि किसान संगठन एकजुट हैं। कोई भी निर्णय सरकार को करना है और उसे इस बात का आकलन करना चाहिए कि इससे उसे क्या फायदा या नुकसान हो सकता है।
टिकैत ने आगे कहा कि यदि दिल्ली में आंदोलन की तैयारी करनी है तो सभी संगठनों को मिलकर स्विफ्ट मोर्चा बनाना होगा और समन्वय के साथ कदम उठाना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि SKM को डराने-धमकाने की कोशिशें हो रही हैं, और इन परिस्थितियों में किसानों को संगठित रहना आवश्यक है।
राकेश टिकैत ने आंदोलन की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान में किसान पंजाब में डटे हुए हैं और इसका असर वहां की आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जिससे किसानों और जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है। टिकैत ने अनुमान जताया कि यह आंदोलन आगामी चार से पांच महीने और जारी रहेगा।
राकेश टिकैत ने किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि चढूनी पहले चुनाव लड़ लें। यदि वे चुनाव से मुक्त हो जाते हैं, तो वापस किसानों के साथ आ जाएं। चुनाव भी एक बड़ी बीमारी है। हमने पहले ही चुनाव लड़ना छोड़ दिया है। टिकैत ने सुझाव दिया कि राजनीति और चुनाव से दूर रहकर ही किसान आंदोलन को मजबूत बनाया जा सकता है।
राकेश टिकैत ने किसानों से अपील की कि वे किसी भी हाल में एकजुट रहें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए। टिकैत के अनुसार कि आंदोलन की ताकत हमारी एकता में है। यदि हम अलग-अलग राहों पर चलेंगे तो इसका फायदा सरकार को होगा। किसानों को सरकार के खिलाफ संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा।




