




Farmers strike: चंडीगढ़ में अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़ में पांच दिन से चल रहा किसानों का धरना शुक्रवार दोपहर को उठ गया। किसान नेताओं ने सरकार को साफ शब्दों में कहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में जिन मांगो पर सहमति बनी है, उन्हें 30 सितंबर तक पूरा किया जाए। इसमें कृषि नीति का ड्राफ्ट सार्वजनिक करने समेत कई मुद्दे शामिल थे।
भारतीय किसान एकता (उगराहां) के प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां ने बताया कि सरकार ने 20 सितंबर तक उन्हें नई कृषि पालिसी का ड्राफ्ट देने का ऐलान किया है। सीएम से मीटिंग में तय हुआ कि खेती पॉलिसी का जो ड्राफ्ट तैयार हुआ है, उसे किसानों व स•ाी विभागों के साथ शेयर किया जाएगा। फिर किसानों व अन्य मेंबरों से मीटिंग की जाएगी। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा। किसानों के कर्ज से जुड़े मामले में कोआपरेटिव बैंक में वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लेकर आएंगे। किसानों पर जो केस गत समय में दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस लेने पर चर्चा हुई है।
हालांकि कई केस में चालान तक पेश किए जा चुके हैं। ऐसे में एडवोकेट जनरल पंजाब से राय लेकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। इसके अलावा भूमिगत जल को बचाने और और खेत के आखिरी किनारे तक नहरी पानी पहुंचाने पर मंथन हुआ।पंजाब के यह किसान भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां ) और खेत मजदूर यूनियन के बैनर तले जुटे हैं।
पंजाब विधानसभा का मानसून सेशन शुरू होने से पहले किसान चंडीगढ़ पहुंच गए थे। करीब 15 साल के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने उन्हें चंडीगढ़ में मोर्चा लगाने की मंजूरी दे दी थी। किसानों ने सेक्टर-34 के दशहरा ग्राउंड में मोर्चा लगाया था। फिर किसानों की मांग थी वह सेशन के दौरान विधानसभा तक मार्च निकालेंगे। लेकिन बाद में चंडीगढ़ प्रशासन ने उन्हें मटका चौक तक मार्च के रूप में जाने दिया था। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह ने मटका चौक पर पहुंचकर किसानों से मांग पत्र लिया था। साथ ही किसानों को विश्वास दिलाया था कि वह उनके वकील बनकर सीएम के समक्ष इस मामले को उठाएंगे।
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