




बता दें कि, मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में 820 एकड़ जमीन को डी- नोटिफाई किया गया था। इस नहर के लिए जिन किसानों ने अपनी जमीन दी थी, वो जमीन की कीमत और नौ फीसदी ब्याज की राशि जमा कराकर अपनी जमीन वापस ले सकते थे।
दादूपुर-नलवी नहर परियोजना 1985 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाना और भू-जल का स्तर सुधारना था। परियोजना के लिए 13 करोड़ रुपये की लागत से सरकार ने यह योजना स्वीकृत की थी। हालांकि, समय के साथ यह परियोजना विवादों में घिर गई और किसानों ने अपनी जमीन वापसी के लिए मांग शुरू की।
इस अवसर पर मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमने किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने हमेशा किसानों के हित में फैसले लिए हैं और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इसे उनके संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और उन्हें अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण करने का अवसर मिलेगा।




