




Natural Farming: हरियाणा के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर), करनाल में किसानों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ पूर्व सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. रणधीर सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि लोगों में बढ़ती बीमारियों के लिए खानपान और फसलों में उर्वरकों व कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग जिम्मेदार है। उन्होंने किसानों से अपील की कि स्वस्थ जीवन के लिए प्राकृतिक खेती अपनाना जरूरी हो गया है।
आयोजन सचिव डॉ. अनिल खिप्पल ने प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों पर चर्चा की, जिससे किसानों को रासायनिक उर्वरकों के बिना भी खेती को सफल बनाने के तरीके जानने का मौका मिला। कार्यशाला में किसान अनन्त बहादुर सिंह ने भी अपने 10 वर्षों के प्राकृतिक खेती के अनुभव साझा किए और किसानों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. सुभाष गिल ने गेहूं और जौ की अधिक पैदावार प्राप्त करने के तरीकों पर जानकारी दी, जबकि डॉ. अमित शर्मा ने किसानों को गेहूं और जौ की नई किस्मों से परिचित कराया। डॉ. सुनील ने गुणवत्ता सुधार पर बात की, और प्रो. कामिनी कुमारी ने प्राकृतिक खेती के सत्र की अध्यक्षता की। संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. ओम प्रकाश अहलावत ने किसानों की जौं की नई किस्मों में रुचि को लेकर खुशी व्यक्त की।
कई राज्यों से आए किसानों को गेहूं और जौं की उन्नत किस्मों के बीज वितरित किए गए हैं, और यह प्रक्रिया 24 अक्तूबर को भी जारी रहेगी। इस कार्यक्रम में संस्थान के मीडिया प्रभारी राजेंद्र शर्मा सहित कई वैज्ञानिक और किसान उपस्थित रहे। सभी ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर चर्चा की और इसे अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया।
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