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Paddy crop disease in Haryana: हरियाणा-पंजाब सीमा पर धान की फसल पर संकट, गुहला चीका क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से हजारों एकड़ फसल तबाह, किसान परेशान

BY: • LAST UPDATED : August 5, 2025
Inkhabar Haryana, Paddy crop disease in Haryana: हरियाणा-पंजाब सीमा से सटे गुहला चीका क्षेत्र में इस समय किसान भारी संकट से गुजर रहे हैं। धान की फसल में अचानक फैली एक अज्ञात बीमारी ने क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गांव दाबा चाबा सहित आसपास के कई गांवों में खड़ी फसलें पीली पड़कर सूखने लगी हैं, जिससे किसानों में भारी चिंता का माहौल है।

अज्ञात बीमारी ने ली धान की फसल को चपेट में

किसानों के अनुसार, दो माह पहले धान की रोपाई की गई थी। उन्होंने खाद, कीटनाशक, सिंचाई सहित फसल की देखरेख में भारी खर्च किया था। लेकिन जुलाई के अंत में अचानक फसल की पत्तियों का रंग बदलने लगा और धीरे-धीरे पौधे मुरझा कर गिरने लगे। बीमारी इतनी तेजी से फैली कि एक सप्ताह में ही खेत बंजर दिखाई देने लगे।

गांव दाबा चाबा के एक किसान ने बताया कि उसकी 8 एकड़ फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। निराश होकर उसने पूरी फसल को खेत में ही जोत दिया ताकि दोबारा कोई अन्य फसल लगाई जा सके। अन्य किसान भी अब फसल को जोतने की तैयारी में हैं क्योंकि बचने की कोई उम्मीद नहीं बची है।

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क्षेत्र की 75% फसल चपेट में

स्थानीय किसानों का कहना है कि इस बार बीमारी ने बहुत बड़ी तबाही मचाई है। अनुमान के मुताबिक क्षेत्र की लगभग 75 प्रतिशत धान की फसल इस बीमारी की चपेट में आ चुकी है। बीमारी के लक्षणों को समझना किसानों के लिए भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि यह कोई सामान्य फफूंद या कीट प्रकोप जैसा नहीं दिख रहा है।

सरकार से जांच और मुआवजे की मांग

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए किसानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कृषि विभाग की टीम मौके पर भेजी जाए ताकि बीमारी की वैज्ञानिक जांच हो सके और यह पता लगाया जा सके कि आखिर इस बार धान की फसल को किस प्रकार की बीमारी ने जकड़ा है।

इसके साथ ही किसानों ने सरकार से फसल क्षति का उचित आंकलन कर मुआवजा देने की मांग भी की है ताकि वह दोबारा रोपाई या वैकल्पिक फसल की तैयारी कर सकें।

घग्गर बेल्ट के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

खासकर घग्गर नदी के किनारे बसे गांव जैसे दाबा चाबा, रामपुरा, बनरासी, वजीरपुर और मलिकपुर में फसल को भारी नुकसान हुआ है। यहां नमी और आद्र्रता की अधिकता के कारण यह बीमारी और तेजी से फैलती दिख रही है। कई किसान अब वैकल्पिक रूप से बाजरा, मक्का या मूंग की बुवाई की सोच रहे हैं, लेकिन समय और संसाधनों की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती है।