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Rain Damage crop in Haryana: हरियाणा में बारिश बना किसानों के लिए अभिशाप, फसलों को हुआ भारी नुकसान

BY: • LAST UPDATED : August 6, 2025
Inkhabar Haryana, Rain Damage crop in Haryana: हरियाणा के चरखी दादरी में लगातार हो रही बारिश अब किसानों के लिए वरदान नहीं, बल्कि अभिशाप बन गई है। एक ओर जहां मानसून की बौछारें सामान्यतः कृषि के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, वहीं इस बार बारिश ने किसानों के खेतों को बर्बादी की ओर धकेल दिया है। खेतों में भारी जलभराव ने कपास, बाजरा और मोटे अनाज की फसलों को नष्ट कर दिया है, जिससे हजारों किसान आज गहरे संकट में हैं।

जलभराव से जीवन अस्त-व्यस्त

गांवों के खेतों में घुटनों तक पानी भर चुका है। किसान बताते हैं कि उनकी मेहनत से तैयार फसलें पानी में सड़ चुकी हैं। जिन फसलों पर उनकी आजीविका निर्भर थी, वे अब केवल पानी में बहते तिनकों की तरह नजर आ रही हैं। यह स्थिति केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं, बल्कि उनके पूरे जीवन को प्रभावित कर रही है।

किसानों का आरोप है कि फसल बीमा योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। उन्होंने समय पर बीमा की किश्तें जमा कीं, लेकिन फिर भी पिछले साल की फसल बर्बादी का मुआवजा अब तक नहीं मिला। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी केवल सर्वेक्षण और फॉर्मल कार्यवाही करते हैं, लेकिन ज़मीनी सहायता कहीं नजर नहीं आती। ऐसे में उनका भरोसा सरकार और बीमा प्रणाली से उठता जा रहा है।

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कीटनाशकों से बढ़ता स्वास्थ्य संकट

एक और गंभीर मुद्दा जो सामने आया है वह है जलभराव वाले इलाकों में कीटनाशकों का प्रवाह। किसानों ने बताया कि बारिश के पानी में खेतों से बहे कीटनाशक नहरों में मिल रहे हैं, जो पीने के पानी और सिंचाई दोनों को प्रदूषित कर रहे हैं। इससे कैंसर, लकवा, डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यह अब सिर्फ किसानों की समस्या नहीं रही, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है।

बिजली विभाग की लापरवाही और बोरवेल की मांग

किसानों ने बिजली विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विभाग बिना मीटर के कनेक्शन दे रहा है, जिससे बिल की अनिश्चितता और दिक्कतें बढ़ रही हैं। साथ ही, बोरवेल के जरिए जल निकासी और सिंचाई का समाधान करने की बात कही जा रही है, लेकिन इस दिशा में ठोस कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य इरिगेशन विभाग के आदेश पर किया जा रहा है और जल्द ही मीटर लगाए जाएंगे।

किसानों ने की ये अपील

किसानों ने सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें तत्काल राहत दी जाए। जलभराव के कारण कई किसानों के घर भी डूबने की कगार पर हैं। आजीविका का संकट तो है ही, अब उनके रहने का ठिकाना भी सुरक्षित नहीं है। अगर यही हाल रहा, तो केवल फसल नहीं, बल्कि किसान खुद डूब जाएगा आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से।