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Yamuna river flood in Sonipat: हरियाणा में यमुना के उफान से तबाही, किसानों की फसलें बर्बाद, प्रशासन से की ये बड़ी मांग

BY: • LAST UPDATED : August 27, 2025

Inkhabar Haryana, Yamuna river flood in Sonipat: हरियाणा के सोनीपत में यमुना नदी के उफान का खतरा अब धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है, लेकिन पीछे छोड़ी गई तबाही किसानों के लिए किसी दर्दनाक तस्वीर से कम नहीं है। नदी का जलस्तर घटने के साथ ही गांव गढ़ी बख्तावरपुर और आसपास के इलाकों में भूमि कटाव और फसलों के नुकसान का भयावह दृश्य सामने आ रहा है। किसानों के अनुसार इस बार 20 फीट तक जमीन नदी में समा गई है, जिससे खेती पूरी तरह चौपट हो चुकी है।

जलस्तर घटा पर संकट गहराया

पिछले दिनों आई बाढ़ जैसी स्थिति से गांवों में दहशत बनी रही। हालांकि अब जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन जैसे ही पानी पीछे हटता गया, वैसे-वैसे असली तबाही उजागर होती चली गई। खेतों में खड़ी फसलें कटाव की भेंट चढ़ गईं और उपजाऊ मिट्टी बहकर नदी में समा गई। किसानों के मुताबिक केवल मौजूदा फसल ही नहीं, बल्कि आने वाले सीजन की बुआई भी संकट में पड़ गई है।

ठोकर न बनने से बढ़ा नुकसान

किसानों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 35 साल से यमुना किनारे ठोकरें (बांध/सुरक्षात्मक संरचनाएं) नहीं बनाई गईं, जबकि हर वर्ष बरसात के मौसम में नदी भूमि कटाव करती है। यदि ठोकरें बनी होतीं तो खेत और फसलें इस तरह बर्बाद न होतीं।

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मुआवजे की उठी मांग

फसलों के नुकसान से किसान आर्थिक तंगी में घिर गए हैं। उनकी लागत पूरी तरह बर्बाद हो गई है और अब भविष्य की खेती भी अनिश्चित नजर आ रही है। किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग उठाई है। साथ ही भविष्य में ठोकर निर्माण की ठोस योजना बनाने की अपील भी की गई है, ताकि हर साल किसानों को इस संकट से न गुजरना पड़े।

निगरानी जारी लेकिन डर कायम

भले ही नदी का पानी घट रहा है, मगर खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। प्रशासन ने यमुना नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने की बात कही है। बावजूद इसके, किसानों के मन में डर गहराता जा रहा है कि कहीं अगली बरसात में वही हालात फिर न बन जाएं।