Inkhabar Haryana, RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की कटौती करने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था संतुलन की ओर बढ़ रही है और महंगाई पर धीरे-धीरे काबू पाया जा रहा है। रेपो रेट में इस कमी का सीधा लाभ होम लोन, कार लोन और अन्य लोन लेने वालों को मिलेगा क्योंकि इससे ब्याज दरों में कमी आएगी और मासिक किस्तें (EMI) कम होंगी।
रेपो रेट में कटौती का मतलब क्या है?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों के लिए सस्ते में उधारी लेना संभव हो जाता है और वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दरों पर लोन देने लगते हैं। इसका प्रभाव सीधा आम जनता और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
रेपो रेट कटौती के मुख्य लाभ:
- ब्याज दरों में कमी – होम लोन, कार लोन और अन्य ऋण सस्ते होंगे।
- EMI में राहत – मासिक किस्तें कम होंगी, जिससे आम आदमी की जेब पर कम बोझ पड़ेगा।
- रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा – घर खरीदना सस्ता होगा, जिससे इस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।
- खरीदारी क्षमता में वृद्धि – कम ब्याज दरों के कारण उपभोक्ता अधिक खर्च कर पाएंगे, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
- व्यापार जगत को समर्थन – छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) के लिए लोन सस्ता होने से व्यापार का विस्तार संभव होगा।
उदाहरण के साथ समझें EMI में राहत
अगर किसी व्यक्ति ने 20 साल के लिए 50 लाख रुपए का होम लोन लिया है और ब्याज दर 8.5% थी, तो 0.25% की कटौती के बाद नई दर 8.25% होगी। इससे हर महीने की EMI में 800 से 1,000 रुपए तक की कमी आ सकती है। पूरी लोन अवधि में यह बचत 1.5 लाख से 3 लाख रुपए तक हो सकती है।
मौद्रिक नीति समिति (MPC) के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
- रेपो रेट अब 6.25% – RBI ने रेपो रेट को 0.25% घटाकर 6.25% कर दिया है।
- पांच साल में पहली बार कटौती – पिछली बार रेपो रेट में कटौती मई 2020 में की गई थी।
- GDP ग्रोथ अनुमान – वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.7% रहने की उम्मीद।
- मुद्रास्फीति दर घटने की संभावना – 2025-26 में मुद्रास्फीति 4.2% तक आ सकती है।
- खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट – खाद्य वस्तुओं की महंगाई में कमी आने की संभावना।
- चालू खाता घाटा (CAD) – यह संतुलित रहेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाएगा।
- भारत का विदेशी मुद्रा भंडार – 31 जनवरी तक यह 630.6 अरब अमेरिकी डॉलर था।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
RBI के इस फैसले से भारत में मांग और खपत को बढ़ावा मिलेगा। लोन सस्ते होने से लोग अधिक निवेश करेंगे, जिससे बाजार को मजबूती मिलेगी। खासतौर पर रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में तेजी देखी जा सकती है। इसके अलावा, छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी व्यापार विस्तार में सहूलियत मिलेगी।
Gurugram News: गुरुग्राम में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी, मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटलीकरण के प्रभावों पर मंथन