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Trump Tariffs on India: अमेरिका के टैरिफ वार से हरियाणा इंडस्ट्री की बढ़ी मुश्किलें, इंडस्ट्रियलिस्ट ने की पीएम मोदी से अपील

BY: • LAST UPDATED : August 7, 2025
Inkhabar Haryana, Trump Tariffs on India: अमेरिका द्वारा भारत पर अचानक 25% अतिरिक्त टैरिफ (Import Duty) लगाने के फैसले ने हरियाणा के रोहतक की नट-बोल्ट इंडस्ट्री को गहरे संकट में डाल दिया है। एयर डिफेंस सिस्टम और चंद्रयान जैसे मिशनों के लिए अहम भूमिका निभाने वाली यह इंडस्ट्री अब अस्तित्व के संकट से जूझती दिख रही है। खासकर, रोहतक की जानी-मानी कंपनी एलपीएस बोशार्ड के एमडी राजेश जैन ने इसे एक बड़ी आर्थिक आपदा बताया है और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप कर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत करने की अपील की है।

25% अतिरिक्त टैरिफ से रोहतक पर पड़ेगा सीधा असर

अमेरिका ने भारत से आयात किए जाने वाले स्टील और एलुमिनियम उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला अमेरिकी एयरक्राफ्ट और डिफेंस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले नट-बोल्ट्स पर सीधा प्रभाव डालेगा। रोहतक की नट-बोल्ट फैक्ट्रियां, जिनका 50% व्यापार केवल निर्यात पर आधारित है, खासकर अमेरिका में, इस निर्णय से भारी नुकसान में आ सकती हैं।

राजेश जैन के अनुसार, रोहतक से हर साल करीब 200 करोड़ रुपए के नट-बोल्ट अमेरिका भेजे जाते हैं। लेकिन यह नुकसान केवल इस सीमा तक नहीं रहेगा अनुमान है कि इस टैरिफ का असर आने वाले समय में 1000 करोड़ रुपए के कुल व्यापार पर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि अगर अगले 4 से 6 महीनों तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका के सभी ग्राहक टूट सकते हैं और फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद होने की नौबत आ सकती है।

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निर्यात पर आधारित इंडस्ट्री को भारी झटका

रोहतक की नट-बोल्ट इंडस्ट्रीज पहले से ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही हैं, और अब टैरिफ के बोझ ने उनकी कमर तोड़ दी है। एलपीएस बोशार्ड अकेले अमेरिका के एयर डिफेंस सेक्टर में उपयोग होने वाले नट-बोल्ट का 200 करोड़ रुपए का निर्यात करती है। यह कंपनी चंद्रयान मिशन के लिए भी उत्पाद उपलब्ध कराती रही है। ऐसे में इस तरह का झटका केवल एक व्यापारिक नुकसान नहीं बल्कि भारत की डिफेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन पर भी प्रभाव डाल सकता है।

राजेश जैन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में नई यूनिट स्थापित करना कोई समाधान नहीं है क्योंकि वहां उत्पादन लागत अत्यधिक है। इससे मुनाफा तो दूर, कंपनियों को और अधिक घाटा उठाना पड़ेगा।

उद्योगपतियों की अपील

उद्योगपति राजेश जैन का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की पुरानी मित्रता इस गंभीर समस्या का समाधान निकाल सकती है। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को “ईगो” छोड़कर इस मुद्दे पर गंभीरता से हस्तक्षेप करना चाहिए और ट्रंप से व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत कर टैरिफ हटवाने की कोशिश करनी चाहिए।

उन्होंने चेताया कि इस टैरिफ का असर तत्काल नहीं, लेकिन धीरे-धीरे हर छोटे-बड़े उद्योग पर दिखाई देगा। आने वाले 4-5 महीनों में जब ऑर्डर रुकने लगेंगे और स्टॉक का निपटारा नहीं होगा, तब जाकर व्यापारियों को असल घाटे का एहसास होगा। यदि अभी सरकार ने कदम नहीं उठाया, तो रोहतक की एक प्रमुख औद्योगिक पहचान पूरी तरह खतरे में आ सकती है।