Inkhabar Haryana, cyber scam Fraud in Haryana: साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच पंचकूला पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पूरे देश में फैले अपने नेटवर्क के ज़रिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहा था। यह गिरोह हाल ही में पंचकूला के मेयर से 42 लाख रुपये की ठगी के मामले में सामने आया, जिसके बाद पुलिस की तत्परता और तकनीकी कौशल से इस संगठित अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया।
क्या हैं पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 26 जून 2025 को हुई, जब पंचकूला के मेयर के बेटे के मोबाइल पर एक संदिग्ध संदेश प्राप्त हुआ। इस मैसेज में उनके बैंक खाते से एक फर्जी और संदिग्ध लेन-देन की सूचना दी गई थी। शुरुआत में यह एक आम साइबर फ्रॉड का मामला प्रतीत हुआ, लेकिन जब लेन-देन की जांच की गई तो सामने आया कि खाते से करीब ₹42.52 लाख रुपये की ठगी हो चुकी थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। साइबर क्राइम यूनिट और बैंक की संयुक्त कार्रवाई के बाद करीब ₹32 लाख रुपये की राशि को ट्रेस कर फ्रीज करवा दिया गया, जिसे जल्द ही पीड़ित को लौटाया जाएगा।
कैसे हुआ गिरोह का खुलासा?
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को पता चला कि यह कोई साधारण ठगी नहीं थी, बल्कि एक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित साइबर गिरोह का काम था। अब तक की कार्रवाई में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए आरोपी सलाउद्दीन अंसारी, श्याम दयाल (उत्तर प्रदेश), देवव्रत, राहुल कुमार उर्फ बंटी, आलोक कुमार उर्फ बंटू और प्रतीक राज उर्फ अंकित (बिहार) हैं। इनके पास से भारी मात्रा में साइबर क्राइम से संबंधित उपकरण जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, फर्जी दस्तावेज और बैंकिंग डिटेल्स बरामद की गई हैं।
12 राज्यों में फैला था नेटवर्क
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि यह गिरोह 12 राज्यों में सक्रिय था, जिनमें महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, हिमाचल प्रदेश, केरल, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना शामिल हैं। अब तक इस गिरोह के खिलाफ इन राज्यों से कुल 17 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। गिरोह द्वारा अब तक लगभग ₹2.75 करोड़ रुपये की ठगी की जा चुकी है।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह को कुछ मामलों में बैंक कर्मचारियों की आंतरिक मदद भी मिली हो सकती है। डीसीपी सूदन ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी बैंककर्मी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की जाएगी।