Inkhabar Haryana, Fake funeral in Faridabad: हरियाणा के फरीदाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो आपके पैरों तले जमीन खिसका देगा। यह मामला जितना चौंकाने वाला है, उतना ही शर्मनाक भी। जिले के पन्हेड़ा कलां गांव में एक बेटे ने अपने जीवित पिता को मृत घोषित कर श्रद्धांजलि सभा रखी और पूरे गांव में ढोल-बाजों के साथ उनकी अंतिम यात्रा तक निकाल दी।
क्या हैं पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 3 अगस्त 2025 को हुई, जब पन्हेड़ा कलां गांव में खुद को ‘स्वामी राजेंद्र देव महाराज’ कहने वाले राजेंद्र ने अपने 79 वर्षीय पिता लालचंद उर्फ लूला की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। इस आयोजन की तैयारी भी किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं थी — गांव भर में 50 से अधिक पोस्टर लगाए गए, मंदिरों में रोटियों का वितरण किया गया, और ढोल-बाजों के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान बेटे राजेंद्र खुद ढोल पर नाचता भी नजर आया।
क्या दी बेटे ने सफाई?
राजेंद्र का दावा है कि उनके पिता 9 महीने पहले गोवर्धन परिक्रमा के लिए निकले थे। इसके बाद वह बनारस और फिर उज्जैन के महाकुंभ चले गए, जहां भगदड़ के दौरान उनका संपर्क पूरी तरह से टूट गया। राजेंद्र का कहना है कि उन्होंने उन्हें कई स्थानों पर ढूंढा लेकिन सफलता नहीं मिली, इसलिए उन्होंने मान लिया कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। इसी मान्यता के आधार पर उन्होंने श्रद्धांजलि सभा रखी।
कैसे आया सच सामने?
श्रद्धांजलि सभा की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो इसकी जानकारी खुद लालचंद को भी मिली। उन्होंने तत्काल एक वीडियो बनाकर गांव के सरपंच को भेजा, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह जिंदा हैं और पिछले 9 महीने से कोसी (उत्तर प्रदेश) में अपने भाई चंदी के घर पर रह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका बेटा राजेंद्र उन्हें मारता था, खाना नहीं देता था और ढाई एकड़ जमीन हड़प चुका है, इसीलिए उन्होंने घर छोड़ दिया था।
पंचायत की सख्त कार्यवाही
वीडियो मिलते ही सरपंच ने श्रद्धांजलि सभा को तुरंत रुकवाया और गांव में आपात पंचायत बुलाई गई। पंचायत में राजेंद्र और उसके परिवार का हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। साथ ही गांव वालों ने पुलिस में शिकायत देने और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मुआवजे की लालच में मौत का नाटक?
गांव वालों का आरोप है कि राजेंद्र ने जानबूझकर यह पूरा नाटक रचा, ताकि वह सरकार से 25 लाख रुपये का मुआवजा प्राप्त कर सके। क्योंकि महाकुंभ में भगदड़ में मारे गए लोगों को सरकार द्वारा मुआवजा देने की घोषणा की गई थी। गांव वाले पहले से ही राजेंद्र की गतिविधियों पर शक जता रहे थे, क्योंकि वह लगातार लोगों को अपने पिता की “मौत” की खबर फैला रहा था। राजेंद्र की पृष्ठभूमि भी कम दिलचस्प नहीं है। उसने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की है, दिल्ली के एक होटल में नौकरी कर चुका है, और ‘बंजारा इवेंट कैटरिंग’ नामक एक कंपनी भी चलाता था। लेकिन साल 2010 के बाद उसने सब कुछ छोड़कर खुद को “स्वामी राजेंद्र देव महाराज” कहना शुरू कर दिया। पिता की जमीन पर ही एक आश्रम बनवाया, जहां वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता है।