Inkhabar Haryana, Haryana Missing Graph Increases: हरियाणा में हालिया आंकड़े एक भयावह सच को उजागर कर रहे है। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 45 से अधिक लोग लापता हो रहे हैं। यह केवल वे मामले हैं, जिनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस थानों में दर्ज की गई है। यह संख्या और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि कई बार परिजन रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराते। हालात इतने गंभीर हैं कि हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग को स्वत: संज्ञान लेना पड़ा और पुलिस विभाग को नोटिस जारी करना पड़ा।
लापता लोगों का बढ़ता ग्राफ
जनवरी 2025 से मार्च 2025 तक की पहली तिमाही में ही प्रदेश से 4,100 से अधिक लोग लापता हुए हैं। यानी मात्र 90 दिनों में औसतन 45 से अधिक लोग प्रतिदिन गायब हो रहे हैं। यह आंकड़ा न केवल प्रशासन के लिए एक चुनौती है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की स्थिति पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। इतना ही नहीं, इसी अवधि में 1,000 से अधिक अपहरण के मामले भी सामने आए हैं, जो कि कानून व्यवस्था की स्थिति को और जटिल बना देते हैं।
मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के चेयरमैन ललित बतरा और सदस्य कुलदीप जैन तथा दीप भाटिया ने इसे संविधान के अनुच्छेद-21 का सीधा उल्लंघन बताया है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
अधिक संवेदनशील होते हैं गुमशुदा व्यक्ति
रिपोर्टों और पूर्ववर्ती घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि लापता होने वाले व्यक्तियों में महिलाएं, बच्चे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग अधिक होते हैं। ये वर्ग मानव तस्करी, यौन शोषण, बंधुआ मजदूरी और अवैध अंग व्यापार जैसे संगठित अपराधों का शिकार बनते हैं। कई बार गुमशुदगी फिरौती, हत्या या अन्य गंभीर अपराधों में बदल जाती है।