Inkhabar Haryana, Panipat corruption case: हरियाणा में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के सरकारी दावों को उस समय गहरा झटका लगा जब पानीपत स्थित एसडीएम कार्यालय में तैनात आरसी क्लर्क को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, करनाल की टीम ने 10,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। इस गिरफ्तारी ने न सिर्फ सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोली है, बल्कि एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, आरोपी रिंकू कुमार पानीपत के लघु सचिवालय स्थित एसडीएम कार्यालय में आरसी क्लर्क के पद पर कार्यरत है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रिंकू ने तीन मोटरसाइकिलों की लोन फ्री आरसी बनवाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। मोटरसाइकिलों के लोन समाप्त हो चुके थे, और शिकायतकर्ता वैध रूप से नई, साफ आरसी बनवाना चाहता था।
आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच 10,000 रुपये की रकम पर “डील” तय हुई। लेकिन इससे पहले कि यह रिश्वत रिंकू कुमार की जेब में जाती, शिकायतकर्ता ने हिम्मत दिखाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, करनाल से संपर्क किया और पूरी जानकारी सौंप दी।
रंगे हाथों हुई गिरफ्तारी
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने तत्काल ट्रैप योजना बनाई। योजना के तहत, शिकायतकर्ता तय समय पर पानीपत के लघु सचिवालय की पार्किंग में आरोपी को रिश्वत की रकम सौंपने पहुंचा। जैसे ही रिंकू कुमार ने ₹10,000 की नकद रकम स्वीकार की, टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की यह कार्रवाई लघु सचिवालय परिसर में हुई, जिससे अन्य कर्मचारियों और आम जनता में हलचल मच गई।
एंटी करप्शन ब्यूरो की “चुप्पी” पर सवाल
हालांकि इस मामले में कार्रवाई की तत्परता सराहनीय रही, लेकिन एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है—आखिर आरोपी की तस्वीरें और पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं की गईं? भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी को मीडिया के सामने पेश किया जाता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और संदेश जाए कि भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन इस बार राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, करनाल ने न केवल आरोपी की गिरफ्तारी की सार्वजनिक घोषणा नहीं की, बल्कि मीडिया को जारी की गई तस्वीर में भी आरोपी का चेहरा धुंधला (ब्लर) कर दिया गया। सोशल मीडिया पर भी वही तस्वीर साझा की गई जिसमें आरोपी की पहचान को छिपाया गया है।