




महिला का कहना है कि पुलिस ने उसे झूठे हनीट्रैप मामले में फंसाया है। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे घर से उठाकर जबरन पैसे के लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया। महिला ने दावा किया कि पुलिस ने रातभर उसे गाड़ी में बैठाए रखा और सुबह उसके कमरे में जबरदस्ती पैसे रखकर झूठा मामला बनाया।
गिरफ्तारी के बाद महिला को जेल भेज दिया गया था, जहां उसकी तबीयत बिगड़ गई। 27 दिसंबर को दौरा पड़ने के बाद उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में महिला ने डॉक्टरों को बताया कि उसके साथ गैंगरेप हुआ है, लेकिन पुलिस उसकी शिकायत नहीं ले रही और न ही उसका मेडिकल करवा रही है। महिला की बात सुनने के बाद डॉक्टरों ने उच्च अधिकारियों को सूचित किया।
28 दिसंबर को महिला के दबाव और रोने के बाद पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए और गैंगरेप का मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि यह घटना गुरुग्राम में हुई थी, इसलिए जीरो एफआईआर दर्ज कर केस गुरुग्राम पुलिस को भेज दिया गया है।
गिरफ्तार महिला ने आरोप लगाया कि सरपंच ने ही पुलिस के साथ मिलकर उसे हनीट्रैप केस में फंसाने की साजिश रची थी। सरपंच करनाल के घरौंडा का निवासी है और उसकी शादी अगले महीने जनवरी में होने वाली है। महिला ने कहा कि पुलिस और सरपंच ने मिलकर उसके खिलाफ साजिश रची और उसे फंसाया।
इस पूरे मामले ने पुलिस की भूमिका पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला का कहना है कि उसकी शिकायत सुनने की बजाय पुलिस ने उसे प्रताड़ित किया और झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की। अब जब मेडिकल रिपोर्ट ने गैंगरेप की पुष्टि कर दी है, पुलिस पर निष्पक्ष जांच का दबाव और बढ़ गया है।




