




ठगों ने बुजुर्ग को वीडियो कॉल के माध्यम से बंधक बना लिया और उसे 11 घंटे 37 मिनट तक अपने बेड से हिलने नहीं दिया। उन्हें धमकी दी गई कि अगर रुपये नहीं दिए गए, तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। ठगी के इस दौर में, ठगों ने बुजुर्ग को एक पत्र भी भेजा, जिसमें नेशनल एंबलम का चित्र था और इसके अंत में मुंबई पुलिस का उल्लेख था, जिससे वह और अधिक डरे हुए थे।
बुजुर्ग ने डर के मारे एफडी तुड़वाकर डीबीएस बैंक के खाते में 65 लाख रुपये भेजे। फिर भी ठगों का पीछा नहीं छूटा, और 9 व 10 दिसंबर को भी वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें बंधक बना कर पैसे की मांग की गई। इसके बाद 12 दिसंबर को इंडसइंड बैंक में 23 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से भेजे गए। 16 दिसंबर को भी 12 लाख रुपये जमा कराए गए, लेकिन फिर भी वीडियो कॉल आती रही। अंत में, बुजुर्ग ने 1930 पर कॉल कर इस ठगी की सूचना दी और पुलिस की मदद ली।
पानीपत पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 22 लाख रुपये को होल्ड कर लिया। इसके बाद साइबर अपराध थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और ऐसे मामलों में ठगों की पहचान के लिए कार्रवाई की जा रही है।




