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Panipat Cyber Crime: पानीपत में बुजुर्ग के साथ हुई अनोखी ठगी, वीडियो कॉल और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी!

BY: • LAST UPDATED : December 19, 2024
Inkhabar Haryana, Panipat Cyber Crime: पानीपत में एक हैरान कर देने वाली साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें एक 71 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंककर्मी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगा गया। ठगों ने इस बुजुर्ग से 1 करोड़ रुपये की भारी रकम हड़प ली। यह घटना पानीपत में पहली बार हुई है, जहां साइबर अपराधियों ने इस प्रकार की धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

धोखाधड़ी का तरीका

घटना की शुरुआत 7 दिसंबर को हुई, जब सेवानिवृत्त बैंककर्मी के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को आरबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से बने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के क्रेडिट कार्ड से दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद कॉल कट गई। लेकिन अगले दिन रात 10:09 बजे दूसरे नंबर से एक वीडियो कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और फिर वही धोखाधड़ी की बात दोहराई। इस बार उसने कहा कि इस अपराध में डिजिटल अरेस्ट किया जाएगा और मामले का निपटारा 1 करोड़ रुपये में किया जा सकता है।

वीडियो कॉल पर बंधक बनाना

ठगों ने बुजुर्ग को वीडियो कॉल के माध्यम से बंधक बना लिया और उसे 11 घंटे 37 मिनट तक अपने बेड से हिलने नहीं दिया। उन्हें धमकी दी गई कि अगर रुपये नहीं दिए गए, तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। ठगी के इस दौर में, ठगों ने बुजुर्ग को एक पत्र भी भेजा, जिसमें नेशनल एंबलम का चित्र था और इसके अंत में मुंबई पुलिस का उल्लेख था, जिससे वह और अधिक डरे हुए थे।

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धोखाधड़ी का वित्तीय नुकसान

बुजुर्ग ने डर के मारे एफडी तुड़वाकर डीबीएस बैंक के खाते में 65 लाख रुपये भेजे। फिर भी ठगों का पीछा नहीं छूटा, और 9 व 10 दिसंबर को भी वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें बंधक बना कर पैसे की मांग की गई। इसके बाद 12 दिसंबर को इंडसइंड बैंक में 23 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से भेजे गए। 16 दिसंबर को भी 12 लाख रुपये जमा कराए गए, लेकिन फिर भी वीडियो कॉल आती रही। अंत में, बुजुर्ग ने 1930 पर कॉल कर इस ठगी की सूचना दी और पुलिस की मदद ली।

पुलिस कार्रवाई

पानीपत पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 22 लाख रुपये को होल्ड कर लिया। इसके बाद साइबर अपराध थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और ऐसे मामलों में ठगों की पहचान के लिए कार्रवाई की जा रही है।