Inkhabar Haryana, Sonipat News: साइबर अपराध के मामले देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं और सोनीपत जिला भी इससे अछूता नहीं है। साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को धोखा देकर उनकी मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। जागरूकता की कमी और लापरवाही के कारण लोग इन अपराधियों का शिकार बन रहे हैं। हालांकि, सोनीपत साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई और बेहतर प्रयासों से न केवल ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा रिकवर किया है, बल्कि अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
सालभर में 110 FIR
पिछले एक साल में साइबर थाने में कुल 113 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 110 पर एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने इनमें से 65 मामलों को सुलझाते हुए 41.27 प्रतिशत मामलों में ठगी गई रकम रिकवर की। जिले में कुल 15.30 करोड़ की ठगी हुई, जिसमें से 6.31 करोड़ (41.27 प्रतिशत) की राशि पीड़ितों को वापस दिलाई गई।
300 से अधिक अपराधी गिरफ्तार
साइबर थाने में 11 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इन कर्मचारियों ने प्रति व्यक्ति गिरफ्तारी में प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। हेल्पलाइन नंबर 1930 पर समय पर शिकायत मिलने पर पुलिस ने ठगी गई राशि को अपराधियों के खातों में पहुंचने से पहले ही फ्रीज कराने का काम किया। सालभर में 300 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार करना पुलिस की एक बड़ी उपलब्धि है।
साइबर अपराधी लगातार अपने तौर-तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। पहले डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग सिखाने और गैस कनेक्शन काटने जैसे तरीकों से ठगी की जाती थी। अब वे बिजली बिल भुगतान, केवाईसी अपडेट, इंश्योरेंस किस्त जमा कराने और नौकरी दिलाने जैसे झूठे वादों के माध्यम से लोगों को फंसा रहे हैं।
जागरूकता की कमी सबसे बड़ी चुनौती
जागरूकता की कमी अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन रही है। साइबर थाना प्रभारी बसंत कुमार ने बताया कि लोगों को इंटरनेट मीडिया पर निजी जानकारी और बैंक खातों से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर साझा करने से बचना चाहिए। किसी भी स्थिति में ओटीपी और अनजान लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी जाती है।
हेल्पलाइन नंबर 1930 का महत्व
साइबर अपराध के बाद 20 मिनट का समय सबसे अहम होता है। इस दौरान ठग ठगी गई राशि को अपने खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। हेल्पलाइन नंबर 1930 पर समय रहते सूचना देने से पुलिस बैंक खातों को फ्रीज करा सकती है। इस जागरूकता के कारण ही पुलिस ने कई बड़े मामलों में अपराधियों को गिरफ्तार किया और ठगी गई राशि को वापस दिलाने में सफलता पाई।
बड़े फ्रॉड में भी सफलताएं
एक मामले में ठगों ने एक रिटायर्ड अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1.78 करोड़ की ठगी की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़ी राशि बैंक खातों में फ्रीज कराई। FIR नंबर 22 में 12.74 लाख, एफआईआर नंबर 29 में 27.86 लाख और एफआईआर नंबर 35 में ₹37 लाख ठगी गई राशि को रिकवर किया गया।