




सुरेंद्र शर्मा मूल रूप से नांगल चौधरी के रहने वाले हैं। उनके परिवार की नांगल चौधरी और सरेली गांवों में काफी जमीन है। उनके पिता बालकिशन शर्मा ने वर्षों पहले गांव में एक धर्मशाला का निर्माण करवाया था। उनकी इच्छा थी कि इस धर्मशाला का उपयोग सभी जातियों और समुदायों के लोग कर सकें।
वर्तमान में, यह धर्मशाला आरोपियों द्वारा एक स्कूल के रूप में इस्तेमाल की जा रही है। जब सुरेंद्र शर्मा को इस बात की जानकारी हुई, तो उन्होंने विवाद बढ़ाने के बजाय सुझाव दिया कि स्कूल में कम से कम 25% गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाए और स्कूल का नाम उनके बाबा रामस्वरूप के नाम पर रखा जाए। लेकिन आरोपियों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
कवि सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि दीपावली के समय उनकी भतीजी लता शर्मा ने उन्हें जानकारी दी कि उनकी संपत्ति के संबंध में एक फर्जी वकालतनामा तैयार किया गया है। इस वकालतनामे का उपयोग कहां-कहां हुआ, इसकी जांच के लिए उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
एडवोकेट हेमंत शर्मा से कानूनी सलाह लेने के बाद, सुरेंद्र शर्मा और उनकी भतीजी ने विस्तृत निरीक्षण करवाकर इस मामले की रिपोर्ट दी। इसके अलावा, उन्होंने पाया कि 2009 में तकसीम से संबंधित दस्तावेजों पर भी उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे।
सुरेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी बुआ पाना और बिमला के बच्चों के भी फर्जी हस्ताक्षर करवाए गए हैं। इतना ही नहीं, आरोपियों ने सरेली गांव की जमीन के रिकॉर्ड में फेरबदल कर पौने चार लाख रुपये का ऋण भी ले लिया।
इस गंभीर मामले को देखते हुए उपायुक्त ने विशेष कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं। यह कमेटी जांच करेगी कि किस अधिकारी के स्तर पर गड़बड़ी हुई और कौन-कौन इसमें शामिल है।
कवि सुरेंद्र शर्मा ने इस पूरे प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनकी संपत्ति को न्यायपूर्ण तरीके से वापस दिलाने की मांग की है। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच के बाद दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी और उनके परिवार की संपत्ति सुरक्षित रहेगी।




