Inkhabar Haryana, Ancient Hanuman Temple in Ambala: हरियाणा की मिट्टी में पहलवानी की परंपरा सदियों पुरानी है। यहाँ के गांवों और कस्बों में कुश्ती सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक संस्कृति रही है एक जीवनशैली, जिसमें शक्ति, श्रद्धा और शौर्य तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। अंबाला का यह ऐतिहासिक स्थल, जहां कभी एक प्रसिद्ध अखाड़ा था और आज भी एक प्राचीन हनुमान मंदिर मौजूद है, इसी परंपरा की अमिट छाप को समेटे हुए है।
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जब अखाड़े बने पूजा स्थल के साथ
पुराने समय में जब लोग अखाड़े बनाते थे, तो वहां भगवान का मंदिर बनाना एक जरूरी परंपरा मानी जाती थी। विशेषकर भगवान हनुमान, जिन्हें बल और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, की मूर्ति अखाड़े में प्रतिष्ठित की जाती थी। पहलवान अखाड़े में उतरने से पहले हनुमान जी की पूजा कर उनसे आशीर्वाद लेते थे। अंबाला में भी ऐसा ही एक ऐतिहासिक अखाड़ा था, जहां कुश्ती की गूंज के साथ-साथ भक्ति की ध्वनि भी गूंजती थी। समय के साथ अखाड़ा मिट गया, लेकिन भगवान हनुमान का वह मंदिर आज भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ खड़ा है।
मुगल काल की दास्तान
स्थानीय मान्यताओं और मौखिक इतिहास के अनुसार, यह हनुमान मंदिर लगभग 600 से 700 वर्ष पुराना है। दिलचस्प बात यह है कि यह मंदिर मुगल काल में मुस्लिमों द्वारा बनवाया गया था, जब धार्मिक सौहार्द अपने चरम पर था।कहा जाता है कि मुगल सम्राट औरंगज़ेब जब दिल्ली की ओर यात्रा करता था, तो उसका मार्ग इस मंदिर और अखाड़े के पास से ही होकर गुजरता था। उस समय मंदिर के सामने एक पुल था, जहां औरंगज़ेब के गुजरने पर ढोल-नगाड़े बजते थे। एक परंपरा, जो शायद सम्राट की अनुमति और श्रद्धा दोनों का संकेत देती थी।
प्राकृतिक आपदा और बदलाव का दौर
पंडित करण गिरी, जो इस मंदिर की सेवा में वर्षों से लगे हुए हैं, बताते हैं कि उनके पूर्वजों के अनुसार जहां आज एक तालाब है, वहीं कभी यह अखाड़ा और मंदिर दोनों स्थित थे। लेकिन 400-500 साल पहले आई एक भीषण बाढ़ में अखाड़ा पूरी तरह बह गया। सिर्फ हनुमान मंदिर ही बचा रहा, जो तब से आज तक वहीं स्थित है। बाढ़ के बाद अखाड़े को दूसरी जगह पर स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन मंदिर को उसकी मूल जगह पर ही रहने दिया गया। यह मंदिर अब उस अतीत का इकलौता जीवित साक्ष्य है, जहां कभी युवाओं की ताकत और आस्था एक साथ फलती-फूलती थी।
भक्ति की लौ अब भी जल रही
समय भले बदल गया हो, लेकिन इस मंदिर की अहमियत कम नहीं हुई है। श्रद्धालु आज भी यहां आते हैं, भगवान हनुमान के चरणों में शीश नवाते हैं और अपनी आस्था प्रकट करते हैं। मंदिर की दीवारों में आज भी इतिहास की वह झलक देखी जा सकती है, जो इसकी परंपरा और महत्व को दर्शाती है।