




Inkhabar Haryana, Ganesh Chaturthi 2024: बात प्रचीनकाल की हैं, जब कौरव और पाण्डवों की सेना युद्ध के लिए तैयार हुई थी तब धर्मराज युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण जी से पूछा था कि हे केशव ! आप यह बताइये कि हमारी विजय किस प्रकार होगी? किस देवता की आराधना से हम सारी सिद्धि प्राप्त कर सकेंगे? तब श्रीकृष्ण जी कहते हैं कि हे धर्मराज आप माता पार्वती के मैल से उत्पन्न हुए गणेशजी की पूजा कीजिए। उनकी पूजा से आप अपने राज्य को पा जायेंगे, यह निश्चित है।
धर्मराज युधिष्ठिर ने जब श्रीकृष्ण से पूछा कि गणेशजी की आराधना कैसे कर सकते हैं तब श्रीकृष्ण कहते हैं, हे युधिष्ठिर! यदि मन में श्रद्धा भाव हो तो भादों शुक्ल चतुर्थी से ही गणेश जी की पूजा शुरू कर दीजिए। व्रती को चाहिए कि वह सुबह उठकर सफेद तिल से नहाये। दोपहर में वह गणेशजी की मूर्ति बनवाएं। मनवांछित सिद्धि के लिए भादों शुक्ल चौथ को इनकी पूजा करें। इनकी पूजा करने से सारी मनोकमना पूरी होती हैं। एक बात ता ध्यान की विधि-एक दांत वाले, सूप के समान फैले कान वाले, हाथी के समान मुंह वाले, चार हाथों वाले, हाथ में पाश और अंकुश पहने हुए ‘सिद्धविनायक’ गणेश जी का हम ध्यान और पुजा करते हैं।
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श्रीकृष्ण बताते हैं कि भाद्र शुक्ल गणेश चतुर्थी की पूजा शिव लोक में हुई है। इस दिन स्नान, उपवास, पूजन, दान करने से गणेश जी की महिमा से फल होता है। हे युधिष्ठिर इस दिन चांद के दर्शन नही करने चाहिए। इसलिए अपने कल्याण की कामना के लिए दोपहर में ही पूजा कर लेनी चाहिए। सिंह राशि की संक्रान्ति में, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को चन्द्र दर्शन करने से हत्या, चोरी, व्यभिचार का झुठा कलंक लगता है। इसलिए आज के दिन चांद के दर्शन करना मना है।




