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Jagannath Puri: धड़कता है आज भी भगवान जगन्नाथ का दिल! क्या है इस मंदिर का रहस्य..

BY: • LAST UPDATED : September 6, 2024

InKhabar Haryana, Jagannath Puri: भारत में ऐतिहासिक रहस्यों और चमत्कारों से भरे कई प्रसिद्ध मंदिर और धार्मिक स्थल देखने को मिलते हैं। ऐसा ही एक मंदीर, उड़ीसा का जगन्‍नाथ पुरी मंदिर देश के चार धामों में से एक है, जो कई ऐतिहासिक रहस्यों से घिरा हुआ है। इस मंदिर का इतिहास अपने आप में बहुत आश्चर्यजनक है। ऐसा माना जाता है कि जगन्नाथ मंदिर में मौजूद मूर्ति के अंदर आज भी भगवान कृष्ण का दिल धड़कता है। तो आइए जानते हैं उस मंदिर में श्रीकृष्ण के धड़कते दिल का रहस्य।

आखिर क्या है इस मंदिर की पौराणिक कथा

मत्स्य पुराण में जगन्नाथ मंदिर के रहस्य का विस्तार से वर्णन देखने को मिलता है। उस मंदिर में भगवान श्री कृष्णा अपने भाई और बहन के साथ विराजमान हैं। मत्स्य पुराण में लिखा है कि भगवान विष्णु जब चारों धामों पर बसे, तो सबसे पहले वह बद्रीनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने स्नान किया। इसके बाद वह गुजरात के द्वारका पहुंचे जंहा उन्होंने अपने कपड़े बदले और फिर वह उड़ीसा की पूरी पहुंचे जहां भगवान विष्णु ने भोजन किया। आखिर में तमिलनाडु के रामेश्वरम पहुंचकर उन्होंने विश्राम किया। हिंदू धर्म में स्वर्ग समान जगन्नाथ पुरी का एक अलग ही महत्व है।

आपको को बता दें कि पूरी स्थित इस मंदिर में अनेकों रहस्य छुपे हुए हैं। ऐसी मान्यता है की भगवान विष्णु हर रोज भोजन करने स्वयं जगन्नाथ पुरी आते हैं। उस मंदिर का प्रसाद कभी खत्म नहीं होता। पूरे विश्व से लाखों की तादात में रोज श्रद्धालु जगन्नाथ पुरी भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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आज भी धड़कता है भगवान का दिल

ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब कृष्ण अवतार में अपने शरीर का त्याग किया था तब उनके शरीर के एक हिस्से को छोड़कर उनका सारा शरीर पंचतत्व में मिल गया। उनके अंतिम संस्कार के बाद भी उनका दिल धड़क रहा था जो आज भी भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के अंदर धड़कता है। वंहा गर्भगृह में स्थित भगवान जगन्नाथ की मूर्ति हर 12 साल बाद बदली जाती है। जब मंदिर की मूर्ति बदली जाती है, तो पुरानी मूर्ति में से ब्रह्म पदार्थ (दिल) निकालकर नई मूर्ति में रखा जाता है। ब्रह्म पदार्थ को ही श्री कृष्ण का दिल कहा जाता है ।

वंहा के पुजारियों का कहना है कि जब वह ब्रह्म पदार्थ का स्थानांतरण करते हैं तब उन्हें उनके हाथ में कुछ उछलता हुआ महसूस होता है। ऐसी मान्यता है कि ब्रह्म पदार्थ को देखने वाला व्यक्ति उसी वक्त अंधा हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है। इसीलिए ब्राह्म पदार्थ के स्थानांतरण के समय पुजारी की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है, जिससे वह ब्रह्म पदार्थ देख नहीं सकते।

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