Inkhabar Haryana, Janmashtami 2025: हरियाणा के जींद गांव अहिरका में इस बार जन्माष्टमी की रौनक कुछ अलग ही देखने को मिल रही है। गांव के सौ साल पुराने राधा-कृष्ण मंदिर को इस वर्ष भी भक्तों और युवाओं ने मिलकर नए अंदाज में सजाया है। परंपरा और आधुनिक सोच के संगम से की गई यह तैयारी ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत अनुभव लेकर आई है।
प्राचीन मंदिर और परंपरा
गांव के महंत नंदराम ने बताया कि यह मंदिर करीब सौ वर्ष पुराना है और यहां राधा-कृष्ण की मूर्तियां शुरू से ही स्थापित हैं। पिछले सात-आठ सालों से जन्माष्टमी का पर्व यहां अलग-अलग थीम पर मनाया जा रहा है। इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए गांव के नौकरीपेशा लोग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा पूरे मनोयोग से इसमें हिस्सा लेते हैं।
प्राकृतिक थीम पर सजावट
इस बार की सबसे खास बात रही मंदिर में बनाया गया प्राकृतिक झूला, जिसमें भगवान कृष्ण के बचपन की झलक को बारीकी से दर्शाया गया है। झूले के चारों ओर छोटे-छोटे कच्चे घर, मटकी, मक्खन, गायें, पेड़-पौधे और ग्रामीण जीवन के दृश्य सजाए गए हैं। इसे देखकर श्रद्धालु अपने आप कान्हा की बाल लीलाओं से जुड़ जाते हैं।
दिल्ली से विशेष सजावट का सामान करीब 55 हजार रुपए खर्च कर मंगवाया गया है। राधा-कृष्ण की पोशाक के लिए मखमली कपड़े (वेलवेट थीम) चुने गए हैं, जो आस-पास उपलब्ध भी नहीं होते। इसके साथ ही करीब 15 हजार रुपए के फूल मंगवाए गए हैं, जो मंदिर की खूबसूरती को और बढ़ा रहे हैं।
युवाओं की मेहनत और समर्पण
मंदिर सजावट की कमान इस बार गांव के युवाओं ने अपने हाथों में ली है। अश्विन भोला, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, अपने सात दोस्तों के साथ दिन-रात जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि पहले ठेके पर काम करवाया जाता था लेकिन उससे मनचाही संतुष्टि नहीं मिलती थी। इस बार उन्होंने खुद अपने हाथों से सजावट की है ताकि भक्तों को हर जन्माष्टमी पर कुछ नया अनुभव मिल सके।
इसी तरह, युवा लवकेश ने बताया कि वे सुबह सात बजे से रात 12 बजे तक काम कर रहे हैं ताकि तैयारियों में कोई कमी न रह जाए। उनका उद्देश्य है कि ठाकुर जी का झूला पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ा हुआ दिखाई दे। पेड़, गायें, कच्चे घर और ग्रामीण जीवन के नजारे झूले के आसपास सजाए गए हैं।
विशेष कार्यक्रम
जन्माष्टमी की रात को मंदिर में विशेष जागरण का आयोजन होगा, जो रात 9 बजे से शुरू होकर 12 बजे तक चलेगा। ठीक 11 बजकर 35 मिनट पर आरती होगी और इसी के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके बाद फिर से आरती और भजन संध्या का आयोजन होगा।