




Inkhabar Haryana, Kamakhya Temple: असम के गुवाहाटी में स्थित माता कामाख्या देवी का मंदिर हैं। यह मंदिर पूरे भारत में मशहूर हैं, माता का मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। कमाख्या देवी मंदिर की खास बात यह है कि यहां न तो देवी की कोई मूर्ति है और न ही कोई तस्वीर हैं। यहां एक कुंड है, जो हमेशा ही फूलों सें ढंका हुआ रहता है। यहां मंदिर में देवी की योनी की पूजा होती है।
बता दें कि धर्म पुराणों के मुताबिक भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के 51 हिस्से किए थे। जहां-जहां यह हिस्से गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया था। वहीं इस स्थान पर माता की योनी गिरी थी जिस वजह से यहां माता की कोई मूर्ति नहीं बल्कि उनकी योनी की पूजा होती है। दुर्गा पूजा, दुर्गादेऊल, बसंती पूजा, पोहान बिया, मदान देऊल, मनासा और अम्बुवासी पूजा पर इस मंदिर की रौनक देखने को मिलती है।
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कहा जाता है कि कामाख्या देवी मंदिर 22 जून से 25 जून तक बंद रहती है। माना जाता है कि इन 3 दिनों में माता सती रजस्वला रहती हैं जिस वजह से पुरुष भी मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते। बताया जाता हैं कि इन 3 दिनों में माता के दरबार में सफेद रंग का कपड़ा रखा जाता है जो की 3 दिनों में लाल रंग का हो जाता है। इस कपड़े को अम्बुवाची वस्त्र कहते हैं और प्रसाद के तौर पर भक्तों को देते है।
जानकारी के मुताबिक, भक्तों की कामना पूरी होने के पर भक्त मंदिर में कन्या को खाना खिलवाते है। वहीं कुछ लोग यहां पर जानवरों की बलि देते हैं। खास बात यह है कि यहां मादा जानवरों की बलि नहीं दी जाती हैं। कामाख्या देवी तांत्रिकों की मुख्य देवी हैं। इन्हें भगवान शिव की नववधू के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यहां पर तांत्रिक बुरी शक्तियों को बड़ी आसानी से भगा देते हैं। यहां के साधुओं के पास कोई चमत्कारी शक्ति होती है जिसका इस्तेमाल साधु बड़े ही सोच समझकर करते हैं।
यह जगह तंत्र साधना के लिए भी खास है। कहा जाता हैं कि अगर किसी पर काला जादू हो तो मंदिर में मौजूद अघोरी और तांत्रिक इसे भगा देते हैं। यहा तक की मंदिर में काला जादू किया भी जाता है।




