Advertisement
Advertisement
होम / HPSC: अब 500 रुपए देकर उत्तर पुस्तिकाएं देख सकेंगे HPSC कैंडिडेट, जारी हुआ नोटिफिकेशन

HPSC: अब 500 रुपए देकर उत्तर पुस्तिकाएं देख सकेंगे HPSC कैंडिडेट, जारी हुआ नोटिफिकेशन

BY: • LAST UPDATED : January 22, 2025
Inkhabar Haryana, HPSC: हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अहम निर्णय लिया है। अब प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले कैंडिडेट को अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाएं देखने का अधिकार मिलेगा। इसके लिए उन्हें 500 रुपये प्रति पेपर का शुल्क अदा करना होगा। हालांकि, अभ्यर्थियों को ये उत्तर पुस्तिकाएं केवल निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी और उन्हें वापस ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम

HPSC ने इस पहल के तहत एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की योजना बनाई है। इस पोर्टल के माध्यम से अभ्यर्थी अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखने के लिए आवेदन कर सकेंगे। आयोग ने घोषणा की है कि निरीक्षण की प्रक्रिया और अन्य विस्तृत जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और अभ्यर्थियों के बीच आयोग की विश्वसनीयता को मजबूत करना है। अभी तक, जिन अभ्यर्थियों को अपने परिणामों पर संदेह होता था, उन्हें अपनी शंकाओं के समाधान के लिए RTI (सूचना का अधिकार) का सहारा लेना पड़ता था या फिर न्यायालय में याचिका दायर करनी पड़ती थी। अब इस नई प्रक्रिया से अभ्यर्थियों को उनके प्रदर्शन की स्पष्टता मिलेगी।

Advertisement

आयोग का दृष्टिकोण

आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पहल से अभ्यर्थियों को अपने प्रदर्शन का वास्तविक मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमारे पास अक्सर ऐसे अभ्यर्थियों के मामले आते हैं, जो अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय में टॉपर होने का दावा करते हैं और अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी का आरोप लगाते हैं। इस पहल से उनकी शंकाओं का समाधान हो सकेगा। हमने पहले ही पूरी मेरिट सूची सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है और अब अभ्यर्थी अपनी उत्तर पुस्तिकाएं भी देख सकेंगे। इससे झूठे दावों पर रोक लगेगी।

संभावित चुनौतियां

हालांकि, इस फैसले के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। आयोग के सूत्रों ने चिंता जताई है कि इससे भविष्य में अनावश्यक मुकदमेबाजी की संभावना बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अभ्यर्थी अपनी उत्तर पुस्तिका का निरीक्षण करने के बाद अन्य अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं से तुलना करने की मांग कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप आयोग को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।