Inkhabar Haryana, Mahipal Dhanda on Haryana NEP Implementation: हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढांडा ने मंगलवार को एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि हरियाणा पूरे देश में पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को 100 प्रतिशत लागू कर दिया है। शिक्षा मंत्री कोसली विधानसभा क्षेत्र के गांव नठेड़ा में एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे, जहां उन्होंने राज्य की शिक्षा प्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।
सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणाम को बताया विपक्ष के मुंह पर तमाचा
अपने संबोधन में महिपाल ढांडा ने कहा कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों में इस बार बड़ा सुधार देखने को मिला है। खासतौर पर साइंस विषय में हरियाणा के छात्रों का प्रदर्शन देश में सर्वश्रेष्ठ रहा है। वहीं, आर्ट्स और कॉमर्स विषयों में भी राज्य के छात्रों का परिणाम संतोषजनक रहा है, जिसे आगामी सत्र में और बेहतर करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों का यह प्रदर्शन उन सभी के लिए करारा जवाब है जो हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।
शिक्षकों की तुलना भगवान हनुमान से की
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों की सराहना करते हुए उनकी तुलना भगवान हनुमान से कर डाली। उन्होंने कहा कि हमारे शिक्षक हनुमान हैं और श्रीराम का कार्य कर रहे हैं। हालांकि इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने इसे शिक्षा मंत्री द्वारा परोक्ष रूप से स्वयं को भगवान श्रीराम से जोड़ने का प्रयास बताया है।
सरकारी स्कूलों पर लौटा भरोसा
ढांडा ने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष लगभग 70,000 नए छात्रों ने सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है, जो यह दर्शाता है कि लोगों का भरोसा फिर से सरकारी शिक्षा प्रणाली की ओर लौट रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कॉलेजों में भी इस बार पहले से ज्यादा छात्रों ने आवेदन किए हैं। ऑनलाइन दाखिले की व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि दाखिला प्रक्रिया की वेबसाइट को लगातार सक्रिय रखा गया है ताकि किसी छात्र को असुविधा न हो।
निजी स्कूल बनाम सरकारी स्कूल पर स्पष्ट रुख
शिक्षा मंत्री ने इस अवसर पर यह स्पष्ट किया कि वे निजी स्कूलों के खिलाफ नहीं हैं और छात्रों के स्कूल चयन को पूरी तरह उनके अभिभावकों की मर्जी पर छोड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी स्कूल पूरी तरह सुरक्षित हैं और राज्य सरकार द्वारा उनमें निरंतर सुधार किए जा रहे हैं।