




InKhabar Haryana, Sleep Cycle: दिन में सोना और रात में सोना, दोनों का प्रभाव हमारे शरीर पर अलग-अलग होता है। डॉ. शिव कुमार सरीन के अनुसार, रात में सोने के दौरान हमारे शरीर में मेलोटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो नींद को नियंत्रित करता है। रात का अंधेरा इस हार्मोन के उत्पादन को बढ़ावा देता है, जिससे गहरी नींद आती है और शरीर को सही तरीके से आराम मिलता है।
इसके विपरीत, दिन में सोने से कई शारीरिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। जब हम दिन में सोते हैं, तो हमारे शरीर के बैक्टीरिया और पाचन क्रियाएं सक्रिय नहीं होतीं। रात के समय खाना खाने पर ये बैक्टीरिया 15 प्रतिशत कैलोरी को बेहतर तरीके से प्रोसेस करते हैं। दिन में सोने से यह प्रक्रिया बाधित हो सकती है, जिससे पाचन में कठिनाई हो सकती है।
रात में सही समय पर सोना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यक्ति को रात 10 बजे से सुबह 4 या 5 बजे तक सोना चाहिए। इस दौरान शरीर को पर्याप्त आराम मिलता है और सुबह जल्दी उठकर एक्सरसाइज या वॉक करने से शरीर में हैपी हार्मोन रिलीज होते हैं, जो दिनभर की ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं।
हालांकि, अगर किसी की कार्य स्थिति के कारण रात में जागना पड़ता है, तो दिन में थोड़ी देर का पावर नैप लेना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसे आदत नहीं बनाना चाहिए। संक्षेप में, सही समय पर सोना और जागना हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।




