




Inkhabar Haryana, Sky Force: भारतीय सिनेमा में देशभक्ति और ऐतिहासिक घटनाओं को पर्दे पर उतारने का एक अलग ही आकर्षण रहा है। ऐसी ही एक महत्वाकांक्षी कोशिश है निर्देशक संदीप केवलानी और अभिषेक अनिल कपूर की फिल्म ‘स्काई फोर्स’। यह फिल्म 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की उस ऐतिहासिक घटना पर आधारित है, जब भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस पर पहली बार एयर स्ट्राइक की थी। मुख्य भूमिकाओं में अक्षय कुमार, वीर पहाड़िया, सारा अली खान, निमरत कौर और शरद केलकर जैसे कलाकार हैं। लेकिन क्या यह फिल्म अपनी कहानी और किरदारों से दर्शकों को बांध पाती है? आइए, जानते हैं।
‘स्काई फोर्स’ की कहानी भारतीय वायु सेना के शहीद स्क्वाड्रन लीडर एबी देवैया के जीवन से प्रेरित है, जिन्होंने 1965 के युद्ध में अपनी वीरता का परिचय दिया था। फिल्म की शुरुआत फ्लैशबैक के साथ होती है और 1971 के युद्ध की झलक दिखाती है। हालांकि, कहानी का केंद्र 1965 की एयर स्ट्राइक है, लेकिन देवैया की भूमिका को फिल्म में बहुत सीमित स्पेस दिया गया है। निर्देशक का मुख्य फोकस अक्षय कुमार के किरदार ओपी तनेजा पर है, जो देवैया के साथ जुड़ी घटनाओं को आगे बढ़ाते हैं।
देवैया की शौर्य गाथा को जिस गहराई और विस्तार की जरूरत थी, वह फिल्म में कहीं गायब-सी लगती है। उनकी जिंदगी और संघर्ष को पूरी तरह से उकेरने के बजाय, फिल्म ने मुख्य रूप से तनेजा के नजरिये से घटनाओं को दिखाने की कोशिश की है। यह फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष है।
फिल्म में अक्षय कुमार एक अनुभवी वायु सेना अधिकारी की भूमिका में हैं, लेकिन उनके अभिनय में विविधता की कमी खलती है। हर फ्रेम में उनका प्रदर्शन एक जैसा महसूस होता है, और उनके लंबे संवादों का प्रभाव भी फीका पड़ता है। दूसरी ओर, एबी देवैया के रूप में वीर पहाड़िया ने ठीक-ठाक काम किया है, लेकिन उनके किरदार को सीमित स्क्रीन स्पेस मिलने के कारण उनकी प्रतिभा उभर नहीं पाई।
सारा अली खान और निमरत कौर के किरदार कहानी में बहुत मामूली हैं। दोनों को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला, और उनके हिस्से में कुछ खास यादगार सीन भी नहीं हैं। सहायक भूमिकाओं में शरद केलकर और मनीष चौधरी ने अच्छा काम किया, लेकिन यह फिल्म पूरी तरह अक्षय कुमार पर निर्भर लगती है।
‘स्काई फोर्स’ देशभक्ति की भावना को उभारने की कोशिश करती है, लेकिन यह दर्शकों के दिलों में गहराई से जुड़ने में असफल रहती है। युद्ध के दृश्य और वायु सेना के ऑपरेशन तकनीकी रूप से प्रभावी हैं, लेकिन उनमें वो रोमांच नहीं है जो दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दे। फिल्म कई जगह भावनात्मक जुड़ाव पैदा करने में चूक जाती है।
फिल्म की सबसे बड़ी कमी है इसकी पटकथा। एबी देवैया जैसे नायक की प्रेरणादायक कहानी को केंद्र में रखते हुए भी, उनकी जिंदगी के महत्वपूर्ण पहलुओं को दरकिनार कर दिया गया। फिल्म का फोकस अगर पूरी तरह से उनकी वीरता और संघर्ष पर होता, तो यह दर्शकों के लिए अधिक यादगार बन सकती थी।
यदि आप देशभक्ति पर आधारित फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो ‘स्काई फोर्स’ एक बार जरूर देखी जा सकती है। यह फिल्म भारतीय वायु सेना के इतिहास की एक अनसुनी गाथा को बड़े पर्दे पर लाती है। लेकिन अगर आप कुछ नई और गहरी कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरेगी।
‘स्काई फोर्स’ एक ऐसी फिल्म है जो एक शानदार कहानी का वादा करती है, लेकिन उस वादे को पूरी तरह निभा नहीं पाती। फिल्म को सिर्फ देशभक्ति की भावना और इतिहास के प्रति सम्मान के लिए देखा जा सकता है।




