




Inkhabar Haryana, CET Exam: हरियाणा में आयोजित होने वाली कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) को लेकर सरकार और अभ्यर्थियों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। यह परीक्षा, जिसे सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था, अब खुद ही असंतोष का कारण बन गई है। युवाओं और अभ्यर्थियों के बीच इस व्यवस्था को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मुद्दे श्वेता धुल जैसे समाजसेवियों और छात्र संगठनों के द्वारा जोरदार ढंग से उठाए गए हैं।
CET के दूसरे चरण में 4 गुणा के बजाय अब 10 गुणा अभ्यर्थियों को चयनित करने का नियम लागू किया गया है। हालांकि, सरकार का यह कदम प्रतीकात्मक रूप से अभ्यर्थियों के हित में दिखता है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
HSSC ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि 10 गुणा अभ्यर्थियों का चयन पोस्ट-वाइज किया जाएगा, ग्रुप-वाइज या कैटेगरी-वाइज। यह अस्पष्टता उम्मीदवारों में असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। इसके कारण कई अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
अभ्यर्थियों का मानना है कि पुलिस भर्ती को CET प्रक्रिया से बाहर रखा जाना चाहिए। पुलिस की भर्तियों के लिए अलग से शारीरिक और मानसिक परीक्षा आवश्यक होती है, जो CET जैसे सामान्य पैमाने से सही तरीके से मापी नहीं जा सकती।
तकनीकी और मेडिकल भर्तियों का पाठ्यक्रम CET से अलग होता है। इन भर्तियों को CET में शामिल करना न केवल अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है, बल्कि यह पूरे भर्ती प्रक्रिया को जटिल और अनियमित बना देता है। इन भर्तियों के लिए अलग से विशेष परीक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए।
पिछली बार की परीक्षा में देखा गया कि एक ही उम्मीदवार का चयन 20-40 बार हो रहा था, जिससे वास्तविक सीटों पर कब्जा नहीं हो पा रहा था। सरकार द्वारा अभी तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं सुझाया गया है। अगर यह समस्या जारी रही, तो परीक्षा और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
CET परीक्षा के लिए फीस वसूली में दो अलग-अलग मापदंड बनाए गए हैं। आधार/PPP के साथ जनरल वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों से 500/-




