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Abhay Singh Chautala: “यह बजट दिखावे मात्र का बजट है जिसके नाम बड़े और दर्शन छोटे हैं”-  अभय चौटाला

BY: • LAST UPDATED : February 1, 2025
Inkhabar Haryana, Abhay Singh Chautala: इनेलो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव चौ. अभय सिंह चौटाला ने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए पेश किए बजट को किसान, कामगार, छोटे व्यापारी, युवा और आम आदमी विरोधी बताते हुए कहा कि आज जो सबसे ज्यादा जरूरतमंद वर्ग हैं उनकी पूर्णतया अनदेखी की गई है। इस बजट में न तो आम आदमी के लिए महंगाई दूर करने की, न ही युवाओं के लिए बेरोजगारी दूर करने की और न ही किसानों को उसकी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की कोई योजना बनाई गई है। वहीं हरियाणा प्रदेश की भी पूरी तरह से अनदेखी की गई है।

कृषि और किसान वर्ग की उपेक्षा

भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर करती है, और महामारी के दौरान भी इस क्षेत्र ने देश को आर्थिक संकट से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद, मौजूदा बजट में कृषि और किसानों को राहत देने के बजाय उनके लिए कई बाधाएं खड़ी कर दी गई हैं।

सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को 1,19,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,18,900 करोड़ रुपये कर दिया है। इसी प्रकार, खाद्य सब्सिडी बजट को 2,05,250 करोड़ रुपये से घटाकर 2,03,420 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, बड़े उद्योगपतियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम सब्सिडी को 11,925 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12,100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार आम किसानों की जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है, जबकि बड़े उद्योगपतियों को प्राथमिकता दे रही है।

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युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी

देश में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन सरकार ने इस दिशा में भी ठोस कदम उठाने से परहेज किया है। मनरेगा जैसी रोजगार गारंटी योजना का बजट 86,000 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि वर्तमान बेरोजगारी दर को देखते हुए इसे बढ़ाया जाना चाहिए था।

युवाओं को राहत देने और रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार बेरोजगारों की कठिनाइयों को समझने में विफल रही है।

महंगाई और आम जनता पर प्रभाव

महंगाई एक ऐसा मुद्दा है जो आम जनता को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। सरकार की नीतियों से गरीब और मध्यम वर्ग को कोई राहत नहीं मिली है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का बजट 2,05,250 करोड़ रुपये से घटाकर 2,03,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

इसी तरह, स्वास्थ्य क्षेत्र की अनदेखी भी चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लिए आवंटित 2,200 करोड़ रुपये के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति सुधारने के लिए अधिक निवेश की आवश्यकता थी।

शिक्षा और सामाजिक कल्याण पर कम खर्च

सरकार ने इस वर्ष जिन मदों में बजट आवंटित किया था, उन्हें भी पूरी तरह खर्च नहीं किया गया। उदाहरण के लिए:

  • कृषि और संबद्ध क्षेत्र के लिए 1,51,851 करोड़ रुपये आवंटित थे, लेकिन केवल 1,40,859 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
  • शिक्षा के लिए 1,25,638 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन मात्र 1,14,054 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
  • स्वास्थ्य के लिए 89,287 करोड़ रुपये आवंटित थे, लेकिन केवल 88,032 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
  • ग्रामीण विकास का बजट 2,65,808 करोड़ रुपये था, लेकिन इसमें से 1,90,675 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए।
  • सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए 56,501 करोड़ रुपये आवंटित थे, लेकिन केवल 46,482 करोड़ रुपये ही उपयोग किए गए।
  • इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, अनुसूचित जाति योजना, ओबीसी एवं ईबीसी स्कॉलरशिप अवार्ड स्कीम जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी अपेक्षित खर्च नहीं किया गया।

हरियाणा की उपेक्षा

अभय सिंह चौटाला ने इस बजट में हरियाणा की पूरी तरह अनदेखी किए जाने पर भी नाराजगी जताई। हरियाणा कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद किसानों को कोई विशेष राहत नहीं दी गई। इसके अलावा, औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास के लिए भी कोई नई योजनाओं की घोषणा नहीं की गई, जिससे राज्य के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

 

 

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