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Bhupinder Hooda on SYL Canal Dispute: “आंखों में धूल झोंकने का”, भूपेंद्र हुड्डा ने SYL मुद्दे पर बार-बार हो रही हरियाणा-पंजाब की बैठकों पर उठाए बड़े सवाल

BY: • LAST UPDATED : August 8, 2025
Inkhabar Haryana, Bhupinder Hooda on SYL Canal Dispute: हरियाणा और पंजाब के बीच सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के निर्माण को लेकर एक बार फिर सियासत गर्मा गई है। इस बार पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा सरकार पर तीखा हमला बोला है। हुड्डा ने SYL मुद्दे पर बार-बार हो रही हरियाणा-पंजाब की बैठकों को “आंखों में धूल झोंकने का खेल” करार देते हुए कहा कि इस तरह की बैठकों का अब कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही हरियाणा के पक्ष में निर्णय दे चुका है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हुड्डा ने साफ कहा कि वर्ष 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बावजूद वर्ष 2004 में पंजाब सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर फैसले को मानने से इनकार कर दिया। हुड्डा का कहना है कि राष्ट्रपति द्वारा दिए गए रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज भी पूरी मजबूती से हरियाणा के पक्ष में कायम है। ऐसे में बार-बार पंजाब सरकार से बैठकों का आयोजन करके हरियाणा सरकार जनता को सिर्फ गुमराह कर रही है।

हुड्डा ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि वह अब और देर न करते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का केस दर्ज कराए, जिससे इस मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान हो सके।

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केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल

हुड्डा ने केंद्र की भाजपा सरकार पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार पिछले 10 वर्षों में अब तक इस गंभीर मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात तक सुनिश्चित नहीं करवा पाई है। इससे सरकार की मंशा पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।

किसानों के बढ़ते कर्ज पर चिंता

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा में हाल ही में हुई भारी बारिश और उससे हुए जलभराव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कहीं भी “विशेष गिरदावरी” (फसलों के नुकसान का सर्वे) शुरू नहीं करवा पाई है। खेतों से पानी निकालने के लिए जो पंप लगाए गए हैं, वे भी बिजली की कमी के कारण बंद पड़े हैं। उन्होंने गोरखपुर थर्मल पावर प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट साल 2017 में चालू हो जाना चाहिए था, लेकिन आठ साल बाद भी इसमें कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

हुड्डा ने हरियाणा के किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि राज्य का औसत किसान अब ₹1,82,922 के कर्ज में दबा है, जो कि नेशनल एवरेज ₹74,000 से कहीं अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 में जहां केवल 8 लाख किसान कर्जदार थे, वहीं आज यह संख्या 28 लाख पहुंच गई है। उन्होंने इसके लिए फसलों की लागत में भारी बढ़ोतरी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी न मिलने को जिम्मेदार ठहराया। हुड्डा ने मांग की कि जिन किसानों की फसलें जलभराव से खराब हुई हैं, उन्हें सरकार तत्काल ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा दे।