ऑपरेशन सिंदूर और विफल विदेश नीति पर सवाल
दीपेंद्र हुड्डा ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत की मौजूदा विदेश नीति की आलोचना से की। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान द्वारा शुरू किए गए “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद वैश्विक प्रतिक्रिया पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि एक भी देश ने पाकिस्तान की निंदा नहीं की। हमारी सरकार की विदेश नीति पूरी तरह से विफल नजर आ रही है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान का हवाला देते हुए चिंता जताई कि ट्रंप कह रहे हैं कि भारत को भी पाकिस्तान से तेल खरीदना पड़ेगा। यहां तक कि वह भारत की अर्थव्यवस्था के खत्म होने की बात कर रहे हैं।
हुड्डा ने यह भी जोड़ा कि भारत को ऐसे समय में एक मजबूत और आत्मनिर्भर विदेश नीति अपनानी चाहिए, जो राष्ट्रीय स्वाभिमान और आर्थिक संप्रभुता की रक्षा कर सके। उन्होंने कहा कि देश किसी भी राजनीतिक दल चाहे वह बीजेपी हो या कांग्रेस से बड़ा है। पहले देश, फिर दल।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
हुड्डा ने वोट चोरी के मुद्दे पर भी सरकार और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र की नींव को हिलाया जा रहा है और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। निष्पक्षता का अभाव साफ नजर आया है। उन्होंने दावा किया कि बहुत से तथ्य सामने आ चुके हैं और आगे भी वोट चोरी से जुड़े कई खुलासे होंगे। यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
अमेरिकी कंपनियों को लेकर कड़ा रुख
प्रेस वार्ता में एक सवाल के जवाब में दीपेंद्र हुड्डा ने अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को समर्थन देने की आलोचना करते हुए भारत में अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के व्यापार पर पुनर्विचार की मांग की। या तो डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा जवाब दिया जाए, अन्यथा उन्हें व्यापार की भाषा में समझाया जाए। अमेरिका अगर पाकिस्तान का साथ दे रहा है तो हमारी मार्केट अमेरिकी कंपनियों के लिए क्यों खुली रहे?
उन्होंने कहा कि मैकडॉनल्ड केवल एक फास्ट फूड कंपनी नहीं, बल्कि अमेरिका की व्यापारिक और आर्थिक नीति का प्रतीक है। मेरा यह कहने का तात्पर्य है कि भारत को अपनी मार्केट अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बंद करने पर विचार करना चाहिए। उनकी मंशा भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता की रक्षा करने की है, न कि किसी व्यापारिक प्रतिशोध की। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर अमेरिका पाकिस्तान का समर्थन करता है, तो अमेरिकी कंपनियों को भारत में व्यापार करने का नैतिक अधिकार भी खो देना चाहिए।