




Inkhabar Haryana, Delhi Assembly 2025: दिल्ली में विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। प्रमुख राजनीतिक दल—आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस—राजधानी की सत्ता हासिल करने के लिए कमर कस चुके हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2025 में समाप्त हो रहा है और चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू करने के साथ चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मतदान 5 फरवरी 2025 को होगा और 8 फरवरी 2025 को परिणाम घोषित किए जाएंगे। 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा का यह चुनाव न केवल राजनीतिक दलों की ताकत की परीक्षा है, बल्कि यह दिल्ली के मतदाताओं की प्राथमिकताओं का आईना भी होगा।
आम आदमी पार्टी, जो पिछले दो विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत से जीती थी, इस बार भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है। 2020 के चुनावों में आप ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा को 8 सीटों से संतोष करना पड़ा था और कांग्रेस खाली हाथ रही थी।
हालांकि इस बार आप को सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप और विपक्ष की बढ़ती आक्रामकता से चुनौती मिल रही है। अरविंद केजरीवाल सरकार ने अपने पारंपरिक मतदाता आधार—महिलाओं और ऑटो चालकों—को लुभाने के लिए कई नई योजनाएँ शुरू की हैं।
मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना, जिसके तहत 18 से 60 वर्ष की महिलाओं को 1,000/- मासिक सहायता दी जा रही है, चुनाव के बाद इसे बढ़ाकर 2,100/- करने का वादा किया गया है। इसके अलावा, ऑटो चालकों के लिए 10 लाख का जीवन बीमा और 5 लाख का दुर्घटना बीमा जैसी योजनाएं पेश की गई हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के ऑटो चालक हमारे सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। हमारी पहली जीत में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और मुझे विश्वास है कि वे इस बार भी हमारे साथ खड़े होंगे।
बता दें कि, भाजपा ने इस बार चुनाव में नेतृत्व परिवर्तन और विकास को मुख्य मुद्दा बनाया है। पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली सीट से प्रवेश वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, जो पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। भाजपा का दावा है कि दिल्ली की जनता आप सरकार से निराश है और वह एक स्थिर और विकासोन्मुखी सरकार चाहती है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता बैजयंत पांडा और वीरेंद्र सचदेवा पार्टी के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। पार्टी ने दावा किया है कि आप की योजनाएं “लोकलुभावन” हैं और उनके वास्तविक लाभ सीमित हैं।
कांग्रेस, जो पिछले दो चुनावों में अपना आधार खो चुकी थी, इस बार वापसी की कोशिश में है। पार्टी ने शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को नई दिल्ली सीट से उतारा है। शीला दीक्षित के शासनकाल को दिल्ली में विकास का “स्वर्णिम युग” कहा जाता है, और पार्टी इसी छवि का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।
नई दिल्ली सीट इस बार चर्चा का केंद्र है। यहां अरविंद केजरीवाल का मुकाबला दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों—प्रवेश वर्मा (भाजपा) और संदीप दीक्षित (कांग्रेस)—से है। यह सीट न केवल केजरीवाल की व्यक्तिगत लोकप्रियता बल्कि भाजपा और कांग्रेस की रणनीतियों का भी परीक्षण करेगी।




