




Inkhabar Haryana, Digvijyay Singh Chautala: हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर किसानों के मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। सत्ता से दूर होते ही जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) को किसानों की अहमियत का एहसास हो गया है। ओम प्रकाश चौटाला के अंतिम कर्मकांड और शोकसभा के बाद, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के छोटे भाई दिग्विजय सिंह चौटाला ने खनौरी बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन में हिस्सा लिया।
1 जनवरी 2025 को खनौरी बॉर्डर की ये तस्वीरें हरियाणा की राजनीति में जेजेपी के संभावित पुनरुत्थान की एक नई रणनीति के तौर पर देखी जा रही हैं। दिग्विजय सिंह चौटाला किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और समर्थन देने की कोशिश करते नजर आए।

खनौरी बॉर्डर पहुंचें दिग्विजय सिंह चौटाला
बता दें कि, खनौरी बॉर्डर पर चल रहे किसानों के धरने में दिग्विजय चौटाला ने न केवल किसानों का समर्थन किया, बल्कि किसान नेताओं के साथ बातचीत भी की। उनके साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, जैसे राजेंद्र लितानी और जोरा सिंह, मौजूद थे। चौटाला ने केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत बातचीत कर किसानों की भूख हड़ताल और धरना समाप्त करवाने की अपील की।
दिग्विजय चौटाला ने इस मौके पर कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए। उनकी यह पहल किसानों के साथ पार्टी के टूटे रिश्ते को सुधारने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
2019 के विधानसभा चुनावों में 10 सीटें जीतकर सत्ता की चाबी संभालने वाली जेजेपी को 2024 में बड़ा झटका लगा था। जाट बहुल हरियाणा में किसानों के मुद्दों से दूरी पार्टी को महंगी पड़ी। पार्टी का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि दिग्विजय चौटाला खुद डबवाली सीट से अपनी जमानत बचाने में ही कामयाब हुए। किसानों से दूर होने की रणनीति ने पार्टी के कोर वोटर्स को भी उनसे दूर कर दिया।
ओपी चौटाला की शोकसभा में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जैसे कई बड़े नेता शामिल हुए थे। लेकिन इस राजनीतिक मजबूती के बावजूद, जमीनी स्तर पर जेजेपी का जुड़ाव कमजोर पड़ता दिखा।
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