




Haryana Assembly Elections: हरियाणा के कलायत विधानसभा क्षेत्र के सबसे छोटे गांव खंडालवा में इस बार किसी ने भी मतदान नहीं किया। यह गांव खास है क्योंकि यहां की आबादी केवल पांच संतों की है, जो खंडालवा मंदिर में रहते हैं। हाल ही में गांव में तीन मतदाता थे, लेकिन किसी ने भी मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। इस गांव को राजस्व रिकॉर्ड में “बे-चिराग गांव” कहा जाता है, जिसका मतलब है कि यहां कोई स्थायी परिवार नहीं है।
खंडालवा गांव में 12वीं तक का एक स्कूल और एक डाकघर भी है, साथ ही यहां के लिए अलग से एक पटवारी भी नियुक्त है। हालांकि गांव में पांच संत रघुनाथ गिरी, धर्मेश्वर गिरी, आत्मा गिरी, लाल गिरी और प्रभात गिरी रहते हैं, लेकिन इनमें से किसी ने भी मतदान नहीं किया। प्रभात गिरी, जो 80 वर्ष के हैं, ने बताया कि जब से उन्होंने सन्यास लिया है, तब से उन्होंने अपना वोट नहीं बनवाया है।
रघुनाथ गिरी ने कहा कि संतों का राजनीति से दूर रहना ही सही है, जबकि धर्मेश्वर गिरी ने कहा कि संत समाज को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उनका मानना है कि संत समाज को निर्विकार भाव से राष्ट्र की सेवा में योगदान देना चाहिए। संतों का मतदान में हिस्सा न लेना गांव की एक और खास पहचान है।
खंडालवा का धार्मिक महत्व भी है। यहां भोलेनाथ को खटवांगेश्वर महादेव के नाम से पूजा जाता है। कहा जाता है कि इक्ष्वाकु वंश के राजा खटवांग, जो भगवान राम से 14 पीढ़ी पहले हुए थे, ने यहां तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें इस स्थान को उनके नाम से जाने जाने का वरदान दिया था। गांव की यह अनोखी स्थिति और धार्मिक महत्ता इसे खास बनाती है।
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