विपक्ष का शुरुआती जोश
पहले दिन कांग्रेस के युवा विधायक बलराम डांगी, जस्सी पेटवाड़, इंदु राज नरवाल और विकास सहारण ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरने का प्रयास किया। विपक्ष को भरोसा था कि सत्ता पक्ष पर दबाव बनेगा और कार्यवाही ठप हो जाएगी। लेकिन वास्तविकता उलट रही। न तो कार्यवाही रुकी और न ही सत्ता पक्ष दबाव में आया। जब चर्चा चल रही थी तब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सदन में मौजूद भी नहीं थे। चूंकि गृह विभाग भी उन्हीं के पास है, विपक्ष चाहकर भी उनकी अनुपस्थिति पर ज्यादा जोर नहीं दे पाया।
सीएम का पलटवार और विपक्ष की खामोशी
जब मुख्यमंत्री सैनी जवाब देने उठे तो उन्होंने विपक्ष को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। रोहतक की चर्चित घटनाओं का हवाला देकर उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल में हालात ज्यादा खराब थे। अपराध से जुड़े आंकड़े भी इस बार सरकार के पक्ष में रहे, क्योंकि पिछले वर्ष की तुलना में घटनाएं कम दर्ज हुई थीं। आंकड़ों की इस बाजीगरी में विपक्ष चुप्पी साधने को मजबूर हो गया।
घोषणाओं से सीएम ने ली बढ़त
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में विपक्ष की धार कुंद करने के साथ-साथ लोकलुभावन घोषणाओं से सत्र की दिशा ही बदल दी। 84 दंगों के पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने का ऐलान कर उन्होंने न सिर्फ सिख समुदाय को साधा बल्कि इस मुद्दे को गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी। अवैध उद्योगों को नियमित करने वाला बिल पास कराकर सैकड़ों छोटे उद्यमियों को राहत दी। गरीबों को मिलने वाले प्लॉट पर स्टांप ड्यूटी खत्म करके उन्होंने सीधा संदेश दिया कि सरकार गरीब हितैषी है।