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Haryana Winter Session:  “1966 में पंजाब और हरियाणा के अलग…”, विधानसभा परिसीमन और चंडीगढ़ पर अधिकार को लेकर विज की टिप्पणी

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Inkhabar Haryana, Haryana Winter Session: हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने हाल ही में अपनी बात रखते हुए हरियाणा विधानसभा के परिसीमन, चंडीगढ़ के अधिकार और कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय जाहिर की, जिनमें हरियाणा विधानसभा में बढ़ोतरी की संभावना और चंडीगढ़ के अधिकार की बात प्रमुख थी।

विधानसभा परिसीमन पर विज का बयान

अनिल विज ने बताया कि 1966 में पंजाब और हरियाणा के अलग होने के समय हरियाणा को विधानसभा में 90 सदस्य मिले थे। उनका कहना था कि अगर परिसीमन होता है, तो अनुमान है कि विधानसभा में सदस्य संख्या बढ़कर 120 हो जाएगी। विज ने यह भी कहा कि अगर सदस्य संख्या बढ़ती है, तो वर्तमान विधानसभा भवन में इन 120 सदस्यों के बैठने के लिए जगह की कमी हो सकती है, इसलिए प्रदेश को जल्द ही एक नए भवन की आवश्यकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा ने इस तैयारी के लिए पहले ही कदम उठा लिए थे।

चंडीगढ़ पर हरियाणा का हक

अनिल विज ने पंजाब के सीएम भगवंत मान की चंडीगढ़ को लेकर की गई टिप्पणी पर जवाब देते हुए कहा कि जब तक पंजाब हरियाणा को अपना पानी नहीं लौटाता और एसवाईएल नहर का पानी नहीं देता, तब तक चंडीगढ़ पर हरियाणा का हक बरकरार रहेगा। उन्होंने साफ कहा कि चंडीगढ़ तब तक पंजाब का नहीं हो सकता, जब तक इन मुद्दों का समाधान नहीं होता। विज ने यह भी जोड़ा कि पंजाब के मुख्यमंत्री जब तक इन मुद्दों को सुलझा नहीं देते, तब तक हरियाणा का दावा चंडीगढ़ पर सही है।

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कांग्रेस पर अनिल विज का हमला

अनिल विज ने कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस ने “झूठ बोलने की यूनिवर्सिटी” बना रखी है। उनका आरोप था कि कांग्रेस के नेताओं को हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने की बजाय चुनाव आयोग और ईवीएम पर दोष लगाने की आदत हो गई है। उन्होंने कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से सवाल किया कि जिन सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की, क्या वहाँ ईवीएम ठीक था? विज ने कहा कि अगर कांग्रेस को किसी चुनाव परिणाम से समस्या है, तो उसे मतदान की मांग करनी चाहिए। साथ ही, विज ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा से यह भी कहा कि वे एक वकील हैं, और ऐसे शब्दों का इस्तेमाल उन्हें शोभा नहीं देता।