




कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और इसमें जाति या संप्रदाय का कोई भेदभाव नहीं होगा। उनका कहना है कि घुसपैठिया चाहे किसी भी समुदाय का हो, अगर वह भारत का नागरिक नहीं है, तो उसे देश से बाहर निकाला जाएगा। यह बयान उनके उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें वे देश की सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करने की बात कर रहे हैं।
रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। भारत सरकार ने इस पर कई बार अपना नजरिया स्पष्ट किया है, लेकिन कृष्ण पाल गुर्जर का यह बयान दर्शाता है कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के कानून के तहत सभी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण राजनीति को स्थान नहीं मिलेगा।
भारत सरकार ने हमेशा अपनी सीमाओं की सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता को प्राथमिकता दी है। अवैध घुसपैठ न केवल देश की सामाजिक संरचना पर असर डालती है, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी एक बड़ा खतरा है। कृष्ण पाल गुर्जर के बयान के बाद जनता के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोग सरकार के इस सख्त रुख का समर्थन कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि यह समस्या जल्द ही हल होगी।




