




Inkhabar Haryana, Krishna Kumar Bedi: भारत में राजनीति और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “वन नेशन, वन इलेक्शन” का विजन चर्चा का विषय बना हुआ है। हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने हाल ही में इस विषय पर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने इसे देश के विकास और स्थिरता के लिए आवश्यक बताया।
मंत्री बेदी ने कहा कि आचार संहिता के कारण विकास कार्यों और सरकार की नीतियों को लागू करने में बाधाएं आती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए “वन नेशन, वन इलेक्शन” की अवधारणा प्रस्तुत की। मंत्री ने संकेत दिया कि संभव है कि आगामी संसद सत्र में इस विषय पर विधेयक लाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह बिल पास होता है, तो यह देशवासियों के लिए बड़ी खुशी की बात होगी।
कृष्ण कुमार बेदी ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार से अधिक जिम्मेदार होती है, लेकिन वर्तमान में विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा है। मंत्री ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की विपक्ष के रूप में भूमिका का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी देशहित की बात आई, बीजेपी हमेशा देश के साथ खड़ी रही।
उन्होंने विपक्ष की विध्वंसक राजनीति की निंदा करते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा विदेशों में देश की बदनामी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस की नीतियों पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ईवीएम (EVM) पर सवाल खड़ी करती है, लेकिन जब झारखंड और दीपेंद्र हुड्डा के चुनाव में जीत होती है, तो वह इस पर चर्चा नहीं करती। यह दोहरी नीति और अवसरवादी राजनीति है।
मंत्री ने विपक्ष को बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों पर उनकी चुप्पी के लिए आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर मुद्दे पर ईवीएम को दोषी ठहराती है, लेकिन बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर कुछ नहीं कहती। उन्होंने इसे विपक्ष का असंवेदनशील रवैया करार दिया।
बजरंग पूनिया और शंभू बॉर्डर के विवाद पर भी बेदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि बजरंग पूनिया शंभू बॉर्डर जाना चाहते हैं, तो जाएं, लेकिन बांग्लादेश भी जाएं। उन्होंने कहा कि यदि पासपोर्ट बनाने में दिक्कत है, तो हम उसे बनवाने में भी मदद करेंगे।
मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार किसान हितों में अच्छा काम कर रही है और प्रदेश की खाप पंचायतें तथा अधिकतर किसान संगठन इसे समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसान आंदोलन में सरकार को दोषी ठहराने का प्रयास निराधार है।




