




कुलदीप शर्मा ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद कई नेता खुद को “सौदागर” समझने लगते हैं, लेकिन हार की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में हमारी हार हमारी ही गलतियों का परिणाम है। सवाल यह है कि क्या इस हार की नैतिक जिम्मेदारी लेने वाला कोई है? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि पदों से चिपके रहने का लालच ही बना हुआ है, तो पार्टी के विकास की उम्मीद करना व्यर्थ है।
कुलदीप शर्मा ने कहा कि पार्टी को एकजुट करने के लिए वे कांग्रेस हाईकमान को नए साल में एक पत्र लिखेंगे। उन्होंने सभी नेताओं को आपसी मतभेद सुलझाने के लिए एक मंच पर आने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर नेताओं के बीच कोई व्यक्तिगत समस्याएं हैं, तो उन्हें खुलकर बातचीत करनी चाहिए।
अपनी बातचीत के दौरान कुलदीप शर्मा ने शायराना अंदाज में कहा कि सब कुछ लूट कर होश में नहीं आएंगे और पार्टी नेताओं को अपना अहंकार त्यागने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को अपने ऊपर ज्यादा भरोसा है, तो कांग्रेस छोड़कर चुनाव लड़कर देख ले। कांग्रेस से बड़ा कोई नहीं है।
आने वाले नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद चुनावों की महत्ता पर बात करते हुए कुलदीप शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को शहरी इलाकों में अपनी रणनीति पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हमने अर्बन सीटों पर खराब प्रदर्शन किया है। अगर कांग्रेस अब भी जागरूक नहीं हुई, तो समय निकल जाएगा। भारतीय जनता पार्टी का निकाय चुनावों पर कब्जा रहता है और हमें इसे चुनौती देने के लिए एकजुट होना होगा।
उन्होंने पार्टी को चेतावनी दी कि केवल एक वर्ग पर निर्भर रहकर कांग्रेस आगे नहीं बढ़ सकती। हमें उन वर्गों को दोबारा साथ लाना होगा, जिन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ा है। यह जानना जरूरी है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। पार्टी को अपनी पुरानी मजबूती वापस पाने के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होगा।
जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनने का मौका मिलता है तो वह कितने तैयार हैं, तो उन्होंने कहा कि मैं पहले भी प्रदेश का कार्यकारी देख चुका हूं। अकेले मेरे अध्यक्ष बनने से कुछ नहीं होगा। सबको साथ लेकर चलने की नीति अपनानी होगी।




