




मीडिया को जारी एक बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार शुरू से ही किसानों को गुमराह करती आ रही है। यदि सरकार ने समय रहते किसानों की मांगों पर विचार किया होता, तो अन्नदाताओं को धरनों और अनशन पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि देश का किसान आज एमएसपी को कानूनी दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन केंद्र सरकार उनकी समस्याओं को अनदेखा कर रही है।
कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बड़े किसान आंदोलनों को झूठे आश्वासनों के सहारे दबाने की कोशिश करती है, लेकिन अब किसान केंद्र के झांसे में आने वाला नहीं है। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा कि एमएसपी का निर्धारण केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है और इसे कानूनी दर्जा भी केवल केंद्र ही दे सकती है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार अब अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए एमएसपी का मुद्दा राज्य सरकारों के हवाले करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने हरियाणा सरकार के संदर्भ में कहा कि अगस्त 2024 में नायब सिंह सैनी की अगुवाई में राज्य सरकार ने 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने की घोषणा की थी। बाद में 19 दिसंबर को इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की गई।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार जिन 24 फसलों की खरीद की बात कर रही है, उनमें से अधिकतर फसलें राज्य में उगाई ही नहीं जातीं। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार का अपने कार्यों का महिमामंडन करने का प्रयास है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र और हरियाणा में भाजपा की सरकारें होने के बावजूद दोनों अलग-अलग बयानबाजी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि MSP के मुद्दे पर भाजपा शासित राज्य सरकारें कांग्रेस शासित राज्यों को निशाना बना रही हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार एमएसपी के नाम पर किसानों को उलझाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है और एमएसपी के लिए जारी आंदोलन को पूरा समर्थन देगी। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाए और MSP को कानूनी दर्जा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए।




