




चौधरी देवी लाल का हरियाणा की राजनीति में बड़ा योगदान रहा। उन्होंने 1977 और 1987 में मुख्यमंत्री पद संभाला। उनकी सादगी और जनसेवा की भावना ने उन्हें जनता के बीच “ताऊ” के रूप में अमर बना दिया। हालांकि, परिवारिक मामलों में उनका रुख सख्त था। एक घटना के अनुसार, तस्करी के आरोप में ओम प्रकाश चौटाला के पकड़े जाने पर उन्होंने उन्हें घर से निकाल दिया था।
ओम प्रकाश चौटाला, चौधरी देवी लाल के सबसे बड़े बेटे, ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया। वे हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) पार्टी का नेतृत्व किया। उनके दो बेटे हैं – अजय चौटाला और अभय चौटाला। अजय चौटाला के 2 बेटे दुष्यंत चौटालाऔर दिग्विजय चौटाला है। अभय चौटाला के बेटों का नाम कर्ण चौटाला, अर्जुन चौटाला है।
परिवार और सत्ता का बंटवारा
चौटाला परिवार में बिखराव 2013 में शुरू हुआ, जब ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला को जेबीटी शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा सुनाई गई। इसके बाद इनेलो की बागडोर अभय चौटाला ने संभाली।
2014 में लोकसभा चुनावों के दौरान अजय चौटाला के बड़े बेटे दुष्यंत चौटाला ने राजनीति में कदम रखा और हिसार लोकसभा सीट से सांसद बने। इसके बाद परिवार में मतभेद और बढ़ गए। 2018 में ओम प्रकाश चौटाला ने दुष्यंत और उनके भाई दिग्विजय चौटाला को इनेलो से बाहर कर दिया।
दुष्यंत चौटाला ने 2018 में जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) का गठन किया। यह नई पार्टी हरियाणा की राजनीति में तेजी से उभरी और 2019 के विधानसभा चुनाव में सत्ता का संतुलन बदलने में अहम भूमिका निभाई।




