




अस्थि कलश यात्रा की शुरुआत पहले दिन फतेहाबाद से हुई। उनके पोते अर्जुन चौटाला और भतीजे आदित्य देवीलाल चौटाला ने इसका शुभारंभ किया। पहले दिन यात्रा फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ (नारनौल), रेवाड़ी होते हुए गुरुग्राम पहुंची। गुरुग्राम में यात्रा का रात्रि ठहराव हुआ।
दूसरे दिन यात्रा ने गुरुग्राम से शुरू होकर फरीदाबाद, पलवल, मेवात, झज्जर, रोहतक, सोनीपत होते हुए पानीपत में रात बिताई। हर पड़ाव पर चौटाला समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिन्होंने अपने नेता को श्रद्धांजलि दी।
अंतिम दिन की यात्रा सुबह पानीपत से शुरू होकर 8 जिलों से होकर गुजरेगी। यह यात्रा पंचकूला में समाप्त होगी। इस दौरान प्रदेशभर के कार्यकर्ता और आम लोग अपने नेता को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ रहे हैं।
अस्थि कलश यात्रा के दौरान ओपी चौटाला के पोते अर्जुन चौटाला ने कहा कि हमारे बीच से ऐसे नेता चले गए जो हजारों की भीड़ में भी कार्यकर्ता को नाम से पहचानते थे। उनके जाने से एक राजनीतिक युग का अंत हुआ। अर्जुन ने कहा कि चौधरी ओम प्रकाश चौटाला एक ऐसा नाम था, जिसने हरियाणा की राजनीति को नई दिशा दी और लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी।
31 दिसंबर को सिरसा में होने वाली रस्म पगड़ी सभा में भारी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है। यह सभा न केवल चौटाला परिवार के लिए बल्कि हरियाणा के लाखों समर्थकों के लिए एक भावनात्मक पल होगी, जहां वे अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे।




