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OP Chautala: हरियाणा के लौह पुरुष ओम प्रकाश चौटाला पंचतत्व में हुए विलीन, बेटे अभय और अजय चौटाला ने दी मुखाग्नि

BY: • LAST UPDATED : December 21, 2024
विनोद लांबा, दिल्ली
Inkhabar Haryana, OP Chautala: हरियाणा की राजनीति के प्रमुख स्तंभ और पांच बार मुख्यमंत्री रहे ओम प्रकाश चौटाला का शनिवार को उनके पैतृक गांव तेजा खेड़ा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 89 वर्षीय ओपी चौटाला, जो अपने राजनीतिक जीवन में दृढ़ता और संघर्ष की मिसाल बने रहे, का अंतिम संस्कार उनके फार्म हाउस पर हुआ। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों समर्थक और राजनीति के कई दिग्गज शामिल हुए, जो उनकी विरासत और जनप्रियता को दर्शाता है।

परिवार ने एकता का दिया संदेश

अंतिम संस्कार के दौरान चौटाला परिवार की एकता देखने लायक थी। उनके बड़े बेटे अजय चौटाला और छोटे बेटे अभय चौटाला ने मिलकर उन्हें मुखाग्नि दी। उनके समाधि स्थल को गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी के 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया था, जबकि चिता के लिए विशेष रूप से लाल चंदन की लकड़ियां मंगाई गई थीं।

ओपी चौटाला के चारों पोतों—दुष्यंत, दिग्विजय, करण, और अर्जुन चौटाला—ने अंतिम रस्मों में भाग लेकर अपने दादा को श्रद्धांजलि दी। यह क्षण पारिवारिक बंधनों और एकता का प्रतीक था, जिसने उनके समर्थकों और अनुयायियों को गहराई से छू लिया।

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राजनीतिक हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

अंतिम संस्कार में भारतीय राजनीति की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री नायब सैनी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। उनकी पार्थिव देह को तिरंगे में लपेटा गया था और उनकी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की पहचान, हरी पगड़ी और चुनाव चिह्न चश्मा भी साथ रखा गया।

दुष्यंत चौटाला ने दी दादा को भावुक श्रद्धांजलि

ओपी चौटाला के पोते और हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अपने दादा को “लौह पुरुष” कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा, “दादा जी की दृढ़ता और उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति ने हमें हमेशा प्रेरणा दी है। वह सच्चे मायनों में हरियाणा के जननायक थे।”

जनता का अपने नेता के प्रति प्रेम

अंतिम यात्रा के दौरान चौटाला समर्थकों ने फूल बरसाए और ‘ओपी चौटाला अमर रहें’ के नारे लगाए। उनका अंतिम संस्कार न केवल एक नेता को विदाई थी, बल्कि एक युग के अंत का प्रतीक भी था। समर्थकों की भारी भीड़, जो अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकी, ने यह साबित कर दिया कि ओपी चौटाला न केवल एक राजनेता बल्कि लाखों दिलों के धड़कन थे।

ओपी चौटाला की अनमोल विरासत

ओम प्रकाश चौटाला की पहचान उनकी हरी पगड़ी और चश्मे से होती थी, जो उनकी राजनीति और व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा थे। उनकी अंतिम विदाई ने यह साबित किया कि उनकी विरासत केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा है जिसने उनके नेतृत्व का अनुभव किया।