




बैठक में बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहे एक अधिकारी (एक्सईएन) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके साथ ही मंत्री राजेश नागर ने अधिकारियों को कर्तव्य के प्रति सचेत रहने की सख्त हिदायत दी। बैठक में एक अन्य अधिकारी की गलत बयानी पर मंत्री नाराज नजर आए और नगराधीश की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर मामले की जांच के आदेश दिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने बताया कि बैठक में कुल 14 शिकायतें रखी गई थीं। इनमें से 7 का समाधान तत्काल कर दिया गया, जबकि एक मामला अदालत में विचाराधीन है। शेष 6 शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं और इन्हें अगली बैठक में उठाया जाएगा।
किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार से बड़ा किसान हितैषी कोई नहीं है। उन्होंने बताया कि हरियाणा देश का पहला राज्य है, जो 24 फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदता है और किसानों को सबसे अधिक मुआवजा देता है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों की समस्याओं का प्रमुख मुद्दा पंजाब सरकार से जुड़ा है और इसे सुलझाने के लिए पंजाब सरकार को आगे आना चाहिए।
मंत्री नागर ने कहा कि हरियाणा सरकार जनता और किसानों के हित में पूरी तरह समर्पित है। शिकायतों का त्वरित निपटारा और अधिकारियों पर सख्ती इस बात का प्रमाण है कि सरकार जन समस्याओं को गंभीरता से ले रही है।
यह बैठक न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का प्रतीक बनी, बल्कि जनता को यह भरोसा भी दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार तत्पर है।




