Inkhabar Haryana, Ranjit Chautala on Jagdeep Dhankhar resignation: भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात को अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस्तीफे का कारण “स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं” बताया गया, लेकिन उनके इस अप्रत्याशित निर्णय ने देशभर में सवालों की झड़ी लगा दी है। आम जनता से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक, सभी यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे की वास्तविक वजह क्या है। इसी कड़ी में हरियाणा के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात जाट नेता चौधरी रणजीत सिंह चौटाला ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर “आश्चर्य” और “संशय” व्यक्त करते हुए कहा कि देश की जनता को इस निर्णय की साफ़ और पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए।
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पारिवारिक रिश्ता और राजनीतिक सफर की याद
चौधरी रणजीत सिंह ने जगदीप धनखड़ से अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए कहा कि धनखड़ से हमारे पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। पहली बार उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय मेरे पिता चौधरी देवीलाल को जाता है। उस समय से ही वह एक ऊर्जावान और समर्पित नेता रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि परिवारिक रिश्ता एक अलग विषय है, लेकिन जब कोई इतना बड़ा पद अचानक छोड़ता है, तो देश की जनता का चिंतित होना स्वाभाविक है।
जाट समुदाय के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
रणजीत चौटाला ने कहा कि जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति बनना जाट समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। इस सरकार में तीन जाट समुदाय के नेताओं को गवर्नर बनाया गया आचार्य देवव्रत, सत्यपाल मलिक और जगदीप धनखड़। लेकिन धनखड़ को उपराष्ट्रपति बनाकर सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के लोगों ने इस पद को लेकर एक गर्व और विश्वास की भावना महसूस की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस पद के लिए धनखड़ पर भरोसा जताना, उनके व्यक्तित्व और योग्यता का प्रतीक था।
इस्तीफे को लेकर उठे सवाल