Inkhabar Haryana, Shyam Singh Rana on Punjab Government: हरियाणा और पंजाब के बीच बीते कुछ समय से बढ़ते जल विवाद को लेकर हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने एक खास बातचीत में कई गंभीर आरोप लगाए और अपने रुख को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार डैम का बहाना बनाकर हरियाणा को मिलने वाला पानी रोक रही है, जो पूरी तरह गलत है। राणा ने इसे चुनावी साजिश करार देते हुए कहा कि यह सब कुछ आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों की गर्माहट को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
BBMB मुद्दे पर उठाए सवाल
श्याम सिंह राणा ने साफ तौर पर कहा कि हरियाणा को हर साल तय मात्रा में पानी मिलता रहा है, लेकिन अब पंजाब सरकार ने जानबूझकर इस प्रक्रिया को बाधित किया है। उन्होंने बताया कि बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) देश का एक संवैधानिक बोर्ड है, जिसका कार्य पानी के न्यायोचित बंटवारे की निगरानी करना है। पंजाब सरकार द्वारा इस संस्था पर पुलिस तैनात करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह देश की एकता के खिलाफ भी है।
राजनीतिक फायदे के लिए पानी का मुद्दा
राणा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सब राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठीक वैसा ही नाटक दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने किया था, जब उन्होंने यमुना के पानी में ज़हर होने का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने उस समय दिल्ली सरकार को समझाने की कोशिश की थी और खुद पानी पीकर दिखाया था कि यमुना का पानी प्रदूषित नहीं है।
हरियाणा को कोर्ट पर भरोसा
कृषि मंत्री राणा ने जोर देकर कहा कि हरियाणा सरकार और उसके नागरिक संविधान की विचारधारा पर चलते हैं और इस मामले में भी संवैधानिक रास्ते से ही हल चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी संविधान की शपथ ली है, इसलिए उन्हें भी उसी मार्ग पर चलना चाहिए। श्याम सिंह राणा ने इस विवाद का समाधान वार्ता के ज़रिए निकालने की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री को बीबीएमबी बोर्ड के साथ बैठकर शांति और सूझबूझ से समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि अगर जरूरत पड़ी तो हरियाणा कोर्ट के आदेश के तहत पूरा पानी लेकर रहेगा और एक बूंद भी पानी नहीं छोड़ेगा।
हरियाणा में पानी की स्थिति और सरकार की तैयारी
कृषि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा में फिलहाल जो भी जल भंडार उपलब्ध है, उसका वितरण योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। जिन इलाकों में पीने के पानी की ज्यादा ज़रूरत है, वहां प्राथमिकता के आधार पर जल आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि 15 जून के बाद राज्य में खेती का समय शुरू होता है, ऐसे में जल की जरूरत और बढ़ जाती है।
राजनीति नहीं, रिश्तेदारी को दें प्राथमिकता
राणा ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि हरियाणा और पंजाब के किसान आपस में रिश्तेदार हैं और दोनों राज्यों में सामाजिक संपर्क गहरे हैं। ऐसे में पानी जैसे जीवनदायिनी संसाधन पर राजनीति करना दोनों राज्यों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। हरियाणा सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र को लेकर भी राणा ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और समय की आवश्यकता के अनुसार ऐसे निर्णय लिए जा सकते हैं।