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Thanesar Assembly Election Controversy: थानेसर चुनाव विवाद पर सुभाष सुधा की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई, अशोक अरोड़ा ने मांगा समय

BY: • LAST UPDATED : January 24, 2025

Inkhabar Haryana, Thanesar Assembly Election Controversy: हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में थानेसर सीट पर हुए नतीजों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व राज्यमंत्री और भाजपा नेता सुभाष सुधा ने प्रतिद्वंदी अशोक अरोड़ा की जीत को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जी वोटिंग हुई और नियमों को ताक पर रखकर शराब व पैसा बांटने जैसी अनियमितताएं की गईं। इस मामले में आज हाई कोर्ट में पहली बार सुनवाई हुई, जिसमें अशोक अरोड़ा ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है।

चुनाव परिणाम को दी गई चुनौती

सुभाष सुधा ने अक्टूबर 2024 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों को चुनौती देते हुए दावा किया कि थानेसर सीट पर फर्जी वोटिंग करवाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि NRI वोटर्स की वोटें उनके प्रतिद्वंदी अशोक अरोड़ा के पक्ष में डाली गईं।

सुधा ने अरोड़ा पर चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके समर्थकों ने शराब और पैसे का वितरण कर वोटरों को प्रभावित किया। उनका कहना है कि ये सभी कार्य चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करते हैं।

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EVM सुरक्षित रखने के आदेश

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुभाष सुधा की याचिका स्वीकार कर ली है। साथ ही निर्वाचन आयोग हरियाणा को निर्देश दिए गए हैं कि थानेसर के ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम को सुरक्षित रखा जाए। इसके बाद जिला निर्वाचन आयोग ने सुभाष सुधा और अशोक अरोड़ा को पत्र लिखकर इस फैसले की जानकारी दी है।

सुभाष सुधा और अशोक अरोड़ा की राजनीतिक खींचतान कोई नई बात नहीं है। दोनों नेता एक समय लोकदल में सहयोगी थे, लेकिन मतभेद के कारण सुधा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद भाजपा में शामिल होकर उन्होंने लगातार दो बार अशोक अरोड़ा को हराकर विधायक बनने में सफलता हासिल की। हालांकि, इस बार अरोड़ा ने सुधा को हराकर पांचवीं बार विधानसभा में प्रवेश किया।

अरोड़ा ने आरोपों को बताया बेतुका

अशोक अरोड़ा ने सुधा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह राजनीतिक द्वेष का नतीजा है। उन्होंने कहा, “सुधा के आरोप पूरी तरह बेतुके हैं। कोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” अरोड़ा ने चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया और अपनी जीत को जनता का समर्थन बताया।

अगली सुनवाई का इंतजार

मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि हाई कोर्ट का फैसला थानेसर की राजनीति पर क्या प्रभाव डालता है। यह विवाद न केवल व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को उजागर करता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में संभावित खामियों की ओर भी ध्यान खींचता है।