Inkhabar Haryana, Anshul Kamboj Test Debut in Manchester: हरियाणा की मिट्टी ने देश को एक से बढ़कर एक क्रिकेट सितारे दिए हैं और अब करनाल का लाल अंशुल कंबोज भी उसी कड़ी में शामिल हो गया है। तेज गेंदबाजी के दम पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले अंशुल ने मैनचेस्टर में भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू कर लिया है। इस मौके पर करनाल के खेल प्रेमियों, परिवार और खासकर उसके कोच की आंखों में गर्व और भावनाओं की एक अलग ही चमक नजर आई।
11 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर
करनाल के स्थानीय मैदान में 11 साल की उम्र से क्रिकेट की बुनियादी शिक्षा लेने वाले अंशुल ने कभी सर्दी-गर्मी नहीं देखी, सिर्फ अपने एक लक्ष्य को आंखों में बसाया कि भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना। उस समय उसके साथ खड़े थे कोच सतीश राणा, जिन्होंने उसे मैदान में घंटों पसीना बहाते देखा और आज उसी अंशुल को टीम इंडिया की जर्सी में देखकर उनकी मेहनत रंग लाई।
कोच सतीश राणा ने भावुक होते हुए कहा कि आज हमारा सपना पूरा हुआ। अंशुल के टेस्ट डेब्यू से मन को बहुत संतोष मिला है। वह बचपन से मेहनती रहा है, उसे सिर्फ एक ही चीज दिखती थी – भारतीय टीम। उन्होंने बताया कि डेब्यू से एक रात पहले उनकी अंशुल से बात हुई थी और उन्होंने उसे सलाह दी थी मैच पर पूरी तरह फोकस करो और भारत के लिए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करो।
पिता की बीमारी के बीच बना क्रिकेटर का जुनून
अंशुल का परिवार एक किसान परिवार है। उसके पिता शुरू से ही खेती करते हैं, लेकिन उनका स्वास्थ्य लंबे समय से ठीक नहीं रहता। इसके बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों में कभी रुकावट नहीं आने दी।
अंशुल के चाचा यशपाल कंबोज ने बताया कि हमारे परिवार के लिए यह दिन बहुत खास है। मेरे भाई ने बीमार होने के बावजूद रोजाना अंशुल को गांव से शहर लाकर क्रिकेट की ट्रेनिंग दिलवाई। आज जब वो टीम इंडिया का हिस्सा बना है, तो हमें लगता है कि उनका हर संघर्ष सफल हो गया है।
करनाल में जश्न का माहौल
जैसे ही अंशुल के डेब्यू की खबर करनाल पहुंची, स्थानीय खेल मैदान में छोटे-छोटे क्रिकेटरों ने ढोल-नगाड़ों के साथ भांगड़ा कर खुशी जताई। वह वही मैदान है जहां अंशुल ने अपने करियर की शुरुआत की थी, और अब वही मैदान उसकी कामयाबी पर गर्व से झूम उठा। कोचों, खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों ने मिठाइयां बांटकर इस ऐतिहासिक पल को सेलिब्रेट किया।
‘गिल-गंभीर का मास्टर स्ट्रोक’
क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं का यह फैसला दूरदर्शिता भरा है। गिल और गंभीर की जोड़ी ने टेस्ट टीम को युवा तेज गेंदबाज अंशुल जैसा नया हथियार दिया है, जो आने वाले वर्षों में भारतीय पेस अटैक की रीढ़ बन सकता है।