




Inkhabar Haryana, Harvinder Singh Padma Shri: गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक भारत का नाम रोशन करने वाले पद्मश्री ओलंपियन तीरंदाज हरविंदर सिंह आज जब अपने शहर चीका लौटे, तो वहां का नज़ारा देखने लायक था। हरविंदर के सम्मान में पूरा शहर उमड़ पड़ा। लोगों ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया और ढोल नगाड़ों की गूंज से शहर गूंज उठा।
बुधवार को राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किए गए हरविंदर सिंह जब अपने गृहनगर लौटे, तो चीका ने उन्हें बाहें फैलाकर अपनाया। इस ऐतिहासिक मौके पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर ने एक विशाल समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, खेल प्रेमी, और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए।
समारोह के दौरान हरविंदर सिंह ने मंच से अपने जीवन के संघर्षों को साझा किया। उन्होंने कहा कि गरीबी ने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा, और मैंने कभी हार नहीं मानी। तीरंदाजी के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण मेरे पास नहीं थे, लेकिन मेरी मेहनत, मेरा जज़्बा और मेरी विकलांगता ही मेरा सबसे बड़ा हथियार बन गए।
उन्होंने आगे बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब एशियाई खेलों में भाग लेने से पहले उनकी मां का निधन हो गया। उस वक्त वह गहरे सदमे में थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और एक दृढ़ निश्चय किया कि अब वह अपनी “भारत मां” का सिर कभी नहीं झुकने देंगे। इसी जज़्बे के साथ उन्होंने एशियाई खेलों में जीत हासिल कर भारत का परचम लहराया।
हरविंदर ने भावुक होते हुए कहा कि जब मैदान में भारत का राष्ट्रगान बजता है और तिरंगा ऊंचा लहराता है, तो वह क्षण मेरे लिए सबसे गर्व का होता है। मुझे तब महसूस होता है कि मेरा हर संघर्ष सफल रहा। उन्होंने कहा कि अर्जुन पुरस्कार और अब पद्मश्री से सम्मानित होने के बाद उनके मन को जो सुकून मिला है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह सब उनकी मेहनत, परिवार, कोच, और उनके समर्थकों की वजह से संभव हो पाया है।




